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कातिल से तू जख्मों की दवा मांग रहा है...

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देवबंद। साहित्यिक व सामाजिक संस्था जहान-ए-अदब एकेडमी के बैनर तले मुशायरे का आयोजन किया गया। जिसमें शायरों ने देर रात्रि तक उम्दा कलाम सुनाकर खूब वाहवाही लूटी। मोहल्ला बेरुन कोटला स्थित उर्दू घर में आयोजित मुशायरे में शायर तनवीर अजमल ने पढ़ा..सारा जमाना रूठता होता न कोई गम, उसने मुझे भुला दिया इसका मलाल है। शमीम किरतपुरी ने कहा..कातिल से तू जख्मों की दवा मांग रहा है, नादान है शोलों से हवा मांग रहा है। अदनान अनवर ने अपने जज्बात कुछ यूं बयां किए..जमाने में यह शोहरत हो गई है, हमें उनसे मोहब्बत हो गई है। रजी उस्मानी ने पढ़ा..प्यार न हो तो लगे पेड़ के नीचे भी है धूप, और अगर प्यार हो सेहरा में भी लगे साए हैं। दिलशाद खुशतर ने कुछ यूं कहा..चांद सूरज से भी बढ़ कर तेरा चेहरा निकला, गम का नासूर समंदर से भी गहरा निकला। फैसल सलमानी ने कहा..गैर तो गैर हैं गैरों से आखिर गिला क्या, यहां तो अपने ही लोग हैं आग लगाने वाले सुनाकर जमकर दाद बटोरी। इनके अलावा आजम साबरी, नफीस खान, सुहैल अकमल, नदीम अहमद ने भी अपना कलाम सुनाया। अध्यक्षता शमीम किरतपुरी व संचालन तनवीर अजमल ने किया। इसमें मुजम्मिल हसन, डॉ. मुन्नन खान, उस्मान खान, फरहान ख्वाजा, बिलाल खान, द नियाल समद, रिहान कुरैशी, अब्दुल्लाह, अफजल गौर आदि मौजूद रहे।
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