उत्तम मार्दव धर्म की पूजा अर्चना की
खतौली। नगर के नौ जैन मंदिरों में दशलक्षण पर्व के दूसरे दिन को मार्दव धर्म के रूप में मनाया गया। इस पावन अवसर पर धर्म आराधना व मंत्रोच्चार सोशल डिस्टेंसिंग के साथ अशोक शास्त्री ने कराया।
इस पावन अवसर पर ऑनलाइन धर्म चर्चा संदेश के माध्यम से अरुण जैन नंगली वालों ने बताया कि मार्दव का अर्थ कोमलता है। सबकी आत्मा एक जैसी कोमल है। हमें व्यर्थ अभिमान करके उसे कलुषित कर लिया है। हमें कभी किसी वस्तु का घमंड नहीं करना है। हमें जियों और सबको जीने दे के सिद्धांत का पालन करना है। समाज व देश में शांति की स्थापना के लिए इस धर्म का अमूल्य योगदान है। इस अवसर पर सिद्धार्थ, रवि, सुनील, सतीश, संजय, वीरेश, राजेंद्र, रामकुमार, राकेश, रतनलाल, जुगमंदर, नेमचंद, अरुण औषधि, योगेश, शीलचंद, राजीव मुखिया, मुकेश एडवोकेट, पतेंद्र, सुरेंद्र, बल्लू जैन, अजय, अनुपम, दीपक, अकलंक, राजकुमार, अतुल, आलोक, नीरज जैन आदि उपस्थित रहे।