जाट कॉलोनी स्थित एनसीसी कैंपस में मंगलवार शाम छेड़छाड़ की हालिया वारदातों को लेकर बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें शहर विधायक, एसपी सिटी व सीआरपीएफ के सीओ समेत अन्य अफसर मौजूद रहे। बैठक में महिलाओं ने बढ़ती छेड़खानी की घटनाओं पर आक्रोश जताते हुए पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए। वहीं, एसपी सिटी ने क्षेत्र में गश्त बढ़ाने के साथ ही सुरक्षा का आश्वासन देकर महिलाओं को शांत किया।
जाट कॉलोनी में हुई बैठक में महिलाओं ने शहर विधायक कपिलदेव अग्रवाल व एसपी सिटी ओमवीर सिंह के समक्ष बिगड़ी कानून व्यवस्था पर आक्रोश व्यक्त किया। क्षेत्र में छेड़छाड़ के साथ ही चेन स्नेचिंग को लेकर भी पुलिस को कठघरे में खड़ा किया गया। वार्ड सभासद संगीता चौधरी ने कानून व्यवस्था की स्थिति पर कहा कि कुछ दिन पूर्व स्नेचर्स उनके व बेटी के साथ मारपीट कर चेन छीन ले गए। इसके बावजूद कोई कार्रवाई अब तक नहीं हुई।
राजबाला पंवार व सुमन बालियान ने कहा कि पिछले कुछ समय से महिलाओं व छात्राओं के साथ मारपीट, उन्हें साइकिल व स्कूटी से गिराने के साथ ही राह चलते घूंसे मारने की घटनाओं में एकाएक बढ़ोतरी हुई है। इससे लोगों में आक्रोश है और यदि अब भी पुलिस व्यवस्था सुधारने में नाकाम रही तो उन्हें अपने हिसाब से सुरक्षा इंतजाम करने पड़ेंगे। शहर विधायक कपिलदेव ने कहा कि इस प्रकार की घटनाएं चिंता का विषय हैं और बेटियों को सुरक्षा का अहसास कराना सरकार की प्राथमिकता है।
यदि कोई घटना होती है तो तत्काल उन्हें अवगत कराएं, कार्रवाई कराई जाएगी। एसपी सिटी ओमवीर सिंह ने कहा कि क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरे लगवाने का प्रयास करने के साथ ही पुलिसिंग भी बढ़ाई जाएगी और भविष्य में इन घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए भी प्रयास किए जाएंगे। इंस्पेक्टर डीके त्यागी ने कहा कि क्षेत्र की गलियों में गश्त बढ़ाने के साथ ही सादी वर्दी में भी पुलिसकर्मी तैनात कर दिए गए हैं।
जनता के सहयोग से बहुत जल्द सब कुछ ठीक कर दिया जाएगा। विकास बालियान ने कहा कि पोस्टर, बैनर लगवा कर बालिकाओं व महिलाओं को उनके अधिकारों के बारे में जानकारी दी जाएगी। समाजसेवी बीना शर्मा ने कहा कि जब भी कहीं कोई छेड़छाड़ या पीछा करते नजर आए, तत्काल 1090 या डायल 100 पर सूचना दें। इंदु पंवार, शारदा तोमर, डॉक्टर उदयवीर सिंह, संजू तोमर, शारदा तोमर, कुसुम बालियान, सुशीला देवी, भगवती भारतीय, कल्पना त्यागी व सविता सिंह समेत बड़ी संख्या में महिलाएं मौजूद रहीं।
छेड़छाड़ की घटनाओं को रोकने में पुलिस प्रशासन नाकाम
जिले में छेड़छाड़ की बढ़ती घटनाओं से पुलिस-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर ही सवालिया निशान लग गया है। अतिसंवेदनशील जिला होने के बावजूद छेड़छाड़ जैसी घटनाओं को रोकने के लिए गठित एंटी रोमियो स्क्वॉड की कार्रवाई केवल अब फाइलों तक सिमट कर रह गई है।
अप्रैल 2017 में सूबे में भाजपा सरकार के गठन के बाद शासन के आदेशों के अनुपालन में जनपद में भी एंटी रोमियो स्क्वॉड का गठन जोर शोर से किया गया था। गठन के बाद एंटी रोमियो स्क्वॉड ने पूरे शहर में मनचलों की मनमर्जी पर प्रभावी अंकुश लगाया, जिससे छेड़छाड़ की घटनाएं काफी हद तक रुक गई।
समय बीतने के साथ ही एंटी रोमियो स्क्व़ॉड की कार्रवाई केवल दिखावे के लिए रह गई। अब आलम यह है कि फाइलों का पेट भरने के लिए एंटी रोमियो स्क्वॉड में नियुक्ति, ट्रांसफर तो बदस्तूर चल रहे हैं। हालांकि वास्तविकता में स्क्वॉड की टीम कहीं नजर नहीं आती। पिछले करीब छह माह के भीतर तो एंटी रोमियो स्क्वॉड की गतिविधियां केवल हवा में ही दौड़ रहीं हैं। ऐसे में लगातार हो रही छेड़छाड़ की घटनाओं में इजाफे के चलते आम जनता एंटी रोमियो स्क्वॉड के गठन पर ही सवाल खड़े करने लगी है।
छेड़छाड़ के चलते हुआ था दंगा
मुजफ्फरनगर। छेड़छाड़ की घटनाओं को लेकर जनपद पहले से ही अति संवेदनशील रहा है। गांव कवाल में ऐसी ही घटना के परिणाम स्वरूप जिले के साथ ही पश्चिमी यूपी के कई जनपदों को वर्ष 2013 में सांप्रदायिक दंगे जैसी वीभत्सता झेलनी पड़ी थी।
दरअसल, गांव कवाल के मजरे मलिकपुरा की युवतियों के साथ स्कूल-कॉलेज आते-जाते कवाल में दूसरे समुदाय के युवकों द्वारा की जाने वाली छेड़खानी की घटनाएं आम बात हो गई थी। इस संबंध में लगातार शिकायतों के बावजूद पुलिस-प्रशासन चैन की नींद सोता रहा, जिसके नतीजे में 27 अगस्त 2013 को एक तरफ से सचिन-गौरव व दूसरी तरफ से शाहनवाज की हत्याएं हुईं। तिहरे हत्याकांड की इसी वारदात के चलते सात सितंबर 2013 को सांप्रदायिक हिंसा हुई, जो देखते ही देखते आसपास के जनपदों में भी फैल गई थी।