- आयोग ने एडीजी मेरठ जोन की निगरानी में किसी दूसरे जिले से मामले की जांच कराने को कहा
- कारोबारी मनीष गुप्ता से पैसा वसलूने और धमकी देकर करोड़ों के प्लाट का बैनामा कराने का मामला
- पायल माहेश्वरी ने पुलिस पर निष्पक्ष जांच नहीं करने का आरोप लगाते हुए की थी आयोग में शिकायत
संवाद न्यूज एजेंसी
मुजफ्फरनगर। महिला आयोग ने डीआईजी सहारनपुर से संजीव जीवा, उसकी पत्नी व साथियों के खिलाफ थाना नई मंडी पर दर्ज मामले की जांच किसी ओर जिले से कराने और एडीजी मेरठ से जोन से जांच की निगरानी करने व 15 सितंबर तक रिपोर्ट भेजने के लिए कहा है।
संजीव जीवा की पत्नी और रालोद महिला मोर्चा की पूर्व प्रदेश महामंत्री नेता पायल माहेश्वरी ने थाना नई मंडी पर दर्ज मुकदमे में निष्पक्ष जांच नहीं करने का आरोप पुलिस पर लगाया है और इस संबंध में राज्य महिला आयोग लखनऊ के समक्ष शिकायत की थी। पटेल नगर निवासी कारोबारी मनीष गुप्ता ने थाना नई मंडी पर दर्ज कराई रिपोर्ट में आरोप लगाया था कि उसने साल 2018 में लक्ष्मण विहार निवासी सुनील गोयल से चार करोड़ रुपये में डेयरी प्लांट का सौदा किया था। इसमें सचिन अग्रवाल को साझेदार रखा। सचिन अग्रवाल ने बिना कोई भुगतान किए आधी साझेदारी देने का दबाव बनाया और नौ फरवरी 2019 को अमित बौना व अमित माहेश्वरी सहित कई लोगों के साथ घर पहुंचकर संजीव जीवा के नाम से धमकी दी और तमंचे से फायर किया। अगस्त 2020 में सचिन ने मामला सुलझाने के लिए पंचमुखी स्थित सभासद प्रवीण मित्तल पीटर के घर बुलाया। यहां बंधक बनाकर उसके साथ मारपीट की गई। सितंबर 2021 में पीटर ने संजीव जीवा का संदेश बताते हुए हत्या की धमकी देकर उससे 153 गज के प्लाट का बैनामा अमित माहेश्वरी की पत्नी अनुराधा के नाम करा लिया। क्रेटा गाड़ी की डाउन पेमेंट के एवज में 4.46 लाख रुपये खाते में जमा कराए।
नई मंडी कोतवाली प्रभारी के मुताबिक इस मामले में प्रेमपुरी निवासी संजीव माहेश्वरी उर्फ संजीव जीवा और उसकी पत्नी पायल माहेश्वरी सहित कुल नौ आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था। एक आरोपी ने कोर्ट में सरेंडर किया था जबकि एक अन्य को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। अन्य आरोपियों को अंतरिम जमानत मिली हुई है। मुख्तार अंसारी गैंग से जुड़ा संजीव जीवा इस समय लखनऊ जेल में बंद है।