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सुप्रीम कोर्ट के फैसले को धर्म की नजर से नहीं देखेंगे: मदनी

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मौलाना अरशद मदनी - फोटो : DEVBAND
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देवबंद (सहारनपुर)। बाबरी मस्जिद-रामजन्मभूमि विवाद को लेकर देश के मुसलमानों की सबसे बड़ी जमात के प्रमुख व सुप्रीम कोर्ट में मामले के पक्षकार मौलाना सैय्यद अरशद मदनी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट जो भी फैसला करे हम उसे धर्म की नजर से नहीं देखेंगे। बल्कि उसका सम्मान करेंगे। क्योंकि यह केस हमने कानून के एतबार से लड़ा है।
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बुधवार को जारी बयान में मौलाना सैय्यद अरशद मदनी ने कहा कि जमीयत उलमा-ए-हिंद के वकील राजीव धवन ने अदालत के सामने तमाम सबूतों को मजबूती के साथ रखा है। इसलिए हमें पूरी उम्मीद है कि फैसला हमारे पक्ष में आना चाहिए, लेकिन उसके बावजूद कोर्ट हमारे द्वारा पेश किए गए सबूतों को कानूनी एतबार से रद्द कर देता है तो उसके बाद वह जो भी फैसला दे हम उसका दिल से सम्मान करेंगे। क्योंकि सुप्रीम कोर्ट मुल्क की सबसे बड़ी अदालत है। उन्होंने कहा कि जमीयत उलमा-ए-हिंद ने यह केस कानून के एतबार से लड़ा है इसलिए हम इसे धर्म की नजर से नहीं देखेंगे। मौलाना मदनी ने यह भी कहा कि इसमें इख्तिलाफ नहीं है कि वहां पर चार सौ वर्ष से मस्जिद थी और उसे तोड़ा गया। अभी बहुत अधिक समय नहीं गुजरा जिसके चलते उस मंजर को देखने वाले आज भी मौजूद हैं। इसलिए हम यह समझते हैं हमारा कानूनी पहलू बड़ा मजबूत है और फैसला हमारे हक में आना चाहिए। इसके साथ ही मौलाना अरशद मदनी ने सभी से फैसले को लेकर अमन कायम रखने की अपील की है।
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