चरथावल। कथा व्यास दिलीप प्रणामी महाराज ने जब तेरे गोकुल पर भीड़ पड़ी भारी, धर लिया गोवर्धन हो गया गिरधारी.. भजन पर श्रद्धालु झूम उठे। गोवर्धन पर्वत को अंगुली पर उठाने का भगवान की लीला का वर्णन अनूठे अंदाज में किया।
महादेव मंदिर प्रांगण में चल रही भागवत कथा के प्रसंग शुरू होने से पूर्व कथा व्यास दिलीप प्रणामी ने गोवर्धन भगवान की पूजा-अर्चना कराई। गोवर्धन पर्वत का उठाने के रहस्य को सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया। बताया कि भगवान कृष्ण ने किस तरह इंद्र का मान मर्दन करने के लिए गोवर्धन की पूजा करवाई। सात दिन और सात रात तक गिरिराज गोवर्धन को अपनी उंगली पर धारण कर जनमानस के अलावा जीव जंतुओं, गाय और ग्वालों की रक्षा की।
वृंदावन में जय जयकार होने लगीं। कथा पंडाल में गिरिराज पर्वत की सात परिक्रमा की गई। गोवर्धन नाथ को छप्पन भोग लगाया गया। यजमान कमल कांत त्यागी, स्वतंत्र मणि और मदन कारीगर सपत्नीक रहे। गौरव त्यागी, संदीप त्यागी, मास्टर सुभाष चंद, रामानंद त्यागी, सुनील सूद, आसू आदि मौजूद रहे।