देवबंद। प्रदेश सरकार द्वारा सीएए, एनआरसी के खिलाफ प्रदर्शन करने पर भेजे गए वसूली नोटिस के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का उलमा और बुद्धिजीवियों ने स्वागत किया।
उलमा का कहना है कि सरकार के मनमाने रवैये और फैसलों पर न्याय पालिका द्वारा रोक लगाया जाना इंसाफ की जीत है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद प्रदेश सरकार द्वारा वसूली नोटिस वापस लिए गए। वहीं, मदरसा जामिया हुसैनिया के वरिष्ठ उस्ताद मौलाना मुफ्ती तारिक कासमी का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश ने सिद्ध किया कि न्याय पालिका सबसे ऊपर है। वर्ग विशेष के खिलाफ जारी नोटिस सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप से प्रदेश सरकार द्वारा वापस लिया जाना कानून की जीत है।
तंजीम अबना-ए-दारुल उलूम के अध्यक्ष मुफ्ती याद इलाही कासमी ने कहा कि केंद्र सरकार को कृषि कानूनों की तरह जबरन लोगों पर थोपे गए नागरिकता संशोधन कानून भी वापस लेना चाहिए। देवबंद मोमिन कांफ्रेंस के अध्यक्ष मो. नसीम अंसारी ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा सीएए और एनआरसी विरोधी प्रदर्शनों में सरकारी संपत्ति के नुकसान की वसूली के नोटिसों की वापसी का सुप्रीम कोर्ट का आदेश जायज है। उसने स्पष्ट कर दिया कि वह कानून के खिलाफ सरकारी आदेश को खारिज कर सकती है।