गांवों में करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद लोगों को टंकियों से पानी नहीं मिलने की शिकायतों को केंद्र सरकार ने गंभीरता से लिया है। पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय ने राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम में जीपीएस आधारित मैपिंग, सेनेटरी सर्वे और जल गुणवत्ता की जांच के लिए नागपुर की कंपनी को जिम्मेदारी सौंपी है।
प्रदेश सरकार से डीएम को आए पत्र में बताया गया है कि नागपुर की एडीसीसी इन्फोकैड कंपनी को ग्रामीण अंचल में पेयजल की जांच की जिम्मेदारी सौंपी है। कंपनी की जांच का काम पूर्वांचल से शुरू करेगी।
अधिशासी निदेशक राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन ने पत्र में कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में समस्त पेयजल स्रोतों की एफटीके द्वारा जल गुणवत्ता जांच के साथ आर्सेनिक हेतु परीक्षण भी होगा। जिला प्रशासन के साथ जिला पेयजल एवं स्वच्छता समिति की इसमें अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। सीडीओ के नियंत्रण में डीडीओ और अधिशासी अभियंता जल निगम, ब्लाक में बीडीओ, ग्राम प्रधान की सक्रिय भागीदारी रहेगी।
कार्रवाई के डर से गांव पहुंचे ठेकेदार
जिला पेयजल एवं स्वच्छता समिति की बैठक में ग्राम प्रधानों जल निगम के भ्रष्टाचार को उजागर कर अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। सीडीओ के ठेकेदारों को जेल भेजने के आदेश के बाद शनिवार को आधा दर्जन गांवों में अपनी टीम को लेकर ठेकेदार पहुंच गए और लीकेज ठीक कराने का काम शुरू कर दिया। सीडीओ अंकित अग्रवाल ने बताया कि वह सभी कार्यों की मॉनिटरिंग करेंगे। विभाग में अब किसी भी कीमत पर अंधेरगर्दी नहीं रहने दी जाएगी। ।
भीम सिंह से चार्ज छीना
जल निगम की पेयजल योजना में बीते कई वर्षों से भारी भ्रष्टाचार और जांचों को दबाए जाने की शिकायत पर सीडीओ ने पेयजल सहायक प्रभारी भीम सिंह से चार्ज छीनकर सुशील अरोड़ा को दे दिया है। सीडीओ के स्टेनो के साथ भीम पर पेयजल सहायक प्रभारी का भी कार्यभार था। सीडीओ ने बताया कि पूरी व्यवस्था को दुरुस्त किया जाएगा।