मुजफ्फरनगर। कूड़े से विद्युत बनाने यानि वेस्ट टू एनर्जी प्लांट का कार्य अधर में लटका है। नीदरलैंड की कंपनी ने पालिका से कहा है कि वह काली नदी का पुल में बाईपास तक के मार्ग का निर्माण पूरा करे। पुल और सड़क निर्माण के बाद ही वेस्ट टू एनर्जी प्लांट लगाने का कार्य शुरू किया जाएगा।
आठ साल पहले पालिका के पूर्व चेयरमैन पंकज अग्रवाल ने अपने कार्यकाल के दौरान नीदरलैंड की कंपनी को मुजफ्फरनगर में वेस्ट टू एनर्जी प्लांट स्थापित करने के लिए आमंत्रित किया था। उनके कार्यकाल के दौरान ही कई बार कंपनी के अधिकारियों ने यहां आकर किदवईनगर स्थित एटूजेड प्लांट का निरीक्षण कर प्लांट स्थापित करने के लिए अपनी डीपीआर भी सौंपी थी, लेकिन हर बार बजट की समस्या खड़ी होने के कारण यह मामला अधर में लटका रहा। दो साल पहले प्रशासन ने इस मामले को फिर ठंडे बस्ते से निकाला और इसमें शासन स्तर से भी बजट की व्यवस्था कराने का काम किया, तो प्लांट तक पहुंचने के लिए काली नदी की ओर से रास्ता और पुल बनाने की अड़चन पैदा हुई।
प्रदेश सरकार ने पुल ओर सड़क बनाने के लिए भी धन की स्वीकृति दे दी। दो साल से लगातार प्रक्रिया चल रही है। काफी मशक्कत के बाद पुल का पैसा जारी हुआ और राज्य सेतु निगम ने निर्माण प्रारंभ कर दिया है। प्लांट से बाईपास के मुख्य मार्ग तक सड़क निर्माण में सबसे बड़ी बाधा सड़क के चौड़ीकरण में जिन किसानों की जमीन आ रही है, उन सबसे बैनामे की प्रक्रिया है।
ईओ प्रज्ञा सिंह ने बताया कि वेस्ट टू एनर्जी प्लांट स्थापित करने की समयावधि मार्च 2025 तय की गई है, हमारा प्रयास है कि इससे पहले पहले ही यह प्लांट स्थापित कर चालू करा लिया जाए। ईओ ने बताया कि पुल का कार्य तेजी से चल रहा है। किसानों से 14 बैनामे हो गए हैं। कुछ बाकी है, उनकी प्रक्रिया जल्द पूरी हो जाएगी। हमारा प्रयास है कि हम जल्द ही कंपनी को पुल और सड़क दे जिससे प्लांट का कार्य शुरू हो सके। सड़क के लिए 15वें वित्त में दो करोड़ 17 लाख रुपये स्वीकृत भी हो गए हैं।