गांव अंतवाड़ा स्टार विलेज के रूप में चयनित
खतौली (मुजफ्फरनगर)। गांव अंतवाड़ा को नागिन (काली नदी) के पुनर्जीवित होने पर अर्थ डे नेटवर्क की ओर से स्टार विलेज के रूप में चयनित किया गया। रविवार को इस संगठन के प्रतिनिधि अनिल अरोड़ा ने इस सहयोग के लिए बधाई दी। उन्होंने ग्राम प्रधान के पति जितेंद्र कुमार को स्टार विलेज का प्रमाण सौंपा।
गांव में प्राइमरी पाठशाला में आयोजित कार्यक्रम में संगठन अर्थ डे नेटवर्क के प्रतिनिधि अनिल अरोड़ा ने कहा कि नीर फाउंडेशन के निदेशक रमनकांत त्यागी की ओर से गांव अंतवाड़ा में 500 सालों से विलुप्त पड़ी नागिन (काली नदी) को उद्गम स्थल पर जीवित करने की मुहिम चलाई थी, जिसमें इस गांव के ग्रामीणों ने भरपूर सहयोग दिया और नदी की भूमि को खाली करते हुए उद्गम स्थल जीवित करने में श्रमदान भी किया। इसके लिए गांव के सभी ग्रामीण धन्यवाद के पात्र हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों को नदी के उद्गम स्थल को सुरक्षित रखना है। पर्यावरण को दूषित होने से बचाने में सहयोग करें। केंद्र और प्रदेश की सरकार भी इस मुहिम पर काम कर रही है। उन्होंने पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए जल के दोहन को रोकना होगा, पॉलिथीन का प्रयोग न करें। गांव अंतवाड़ा को संगठन की ओर से स्टार विलेज के रूप में चयनित किया गया है। संगठन की ओर से जागरूकता, पौधरोपण और काली नदी के चल रहे उद्धार कार्य में सहयोग दिया जाएगा। नीर फाउंडेशन के निदेशक रमनकांत त्यागी ने बताया कि वाशिंगटन के संगठन अर्थ डे नेटवर्क की ओर से प्रत्येक वर्ष दस गांवों को चयनित किया जाता है। कार्यक्रम की अध्यक्षता बाबा रतनसिंह और संचालन राजबीर गुर्जर एडवोकेट ने किया। कार्यक्रम में प्रधान जितेंद्र कुमार, प्रताप सिंह गुर्जर, बुलेराम भगत जी, सचिन कुमार, पूर्व प्रधान रकम सिंह, पूर्व प्रधान सुंदर भैय्या, धनपाल, रामानंद डायरेक्टर, अंतराम, मामचंद आदि उपस्थित रहे।
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अंतरराष्ट्रीय शूटर दादी ने उद्गम स्थल देखा था
खतौली। गांव अंतवाड़ा में पिछले वर्ष 13 दिसंबर को अंतरराष्ट्रीय शूटर रही दादी चंद्रो तोमर व प्रकाशी तोमर ने नागिन (काली नदी) के उद्गम स्थल पर पहुंच कर श्रमदान तथा पौधरोपण किया। इस दौरान उन्होंने नदी की जलधारा को देख कहा था कि नीर फाउंडेशन के निदेशक रमनकांत त्यागी ने एक सराहनीय कार्य किया है। नदी को जिंदा करने की अच्छी पहल है। नदी को जीवित करने की हम सब की जिम्मेदारी है। आज नदियों का पानी दूषित हो चुका है। नदी में गिरने वाले नालों से आने वाले दूषित पानी को सरकार को रोकना चाहिए, जिससे नदियों में स्वच्छ पानी की जलधारा बहती रहे तथा देशवासियों को इनका लाभ मिलता रहे। इस दौरान उन्होंने नदी के उदगम स्थल पर पौधारोपण करने के बाद श्रमदान भी किया था।