राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम में मोबाइल हेल्थ टीम के लिए लगाई गई 27 गाड़ियों की टेंडर प्रक्रिया में घोटाला सामने आया है। सीडीओ अंकित अग्रवाल की अध्यक्षता में गठित चार सदस्य अधिकारियों की टीम ने जांच के बाद रिपोर्ट डीएम को सौंप दी है। डीएम ने तत्कालीन सीएमओ डॉ सुबोध कुमार, वित्तीय लेखाधिकारी डॉ देवानंद, चार डॉक्टर, पटल लिपिक और गाड़ियां उपलब्ध कराने वाली चार फर्मों के खिलाफ निदेशक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन को कार्रवाई की संस्तुति की है।
तत्कालीन सीएमओ डॉ सुबोध कुमार ने राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य मिशन में मोबाइल हेल्थ टीमों के लिए 27 टैक्सी के लिए टेंडर निकाले थे। टेंडरों में धांधली सामने आने के बाद राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन लखनऊ के निदेशक ने डीएम को पत्र भेजकर मामले की जांच करने के लिए कहा था। डीएम ने सीडीओ अंकित अग्रवाल की अध्यक्षता में एक जांच कमेटी गठित की। इस कमेटी में वरिष्ठ कोषाधिकारी, एआरटीओ प्रशासन और वर्तमान सीएमओ को सदस्य बनाया गया।
कमेटी ने जांच के बाद अपनी रिपोर्ट डीएम को सौंप दी है। रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि टेंडर प्रक्रिया में दो वर्ष से पुराने वाहन शामिल करने पर रोक थी। इसके बाद भी पूर्व सीएमओ सुबोध कुमार ने टेंडर में 27 में से 14 वाहन ऐसे शामिल किए, जो दो वर्ष से पुराने थे। इन 14 वाहनों में छह वाहन सुपर एंटरप्राइजेज शामली, मां शाकुम्भरी एंटरप्राइजेज के तीन, एमएस एंटर प्राइजेज शामली के चार और बालाजी एंटरप्राइजेज खतौली का एक वाहन शामिल है।
जांच में यह भी सामने आया कि दस वाहनों के जनपद में रजिस्ट्रेशन भी नहीं हैं। चारों फर्मों को दो वर्ष से पुराना वाहन देने के लिए दोषी माना गया। इसी के साथ चार वाहन विभाग को ऐसे दे दिए गए जो टेंडर में नहीं थे। टेंडर दूसरे वाहनों का हुआ और दे दिए गए दूसरे। उक्त वाहन आजकल पुरकाजी, गालिबपुर, बुढ़ाना और मोरना चिकित्सालय में चल रहे हैं। इन स्वास्थ्य केंद्रों के चिकित्सा प्रभारी डॉ मुकेश कुमार, डॉ पुष्पेंद्र, डॉ सतीश कुमार, डॉ संजीव कुमार को भी दोषी माना गया है।
सीएमओ डॉ सुबोध कुमार ने 2015-16 के वाहनों को ही बिना टेंडर प्रक्रिया अपनाए 2016-17 में भी लगा दिया। पटल सहायक पूरन सिंह और वित्त एवं लेखाधिकारी डॉ देवानंद ने भी भुगतान का अनुमोदन कर दिया। जांच रिपोर्ट में चारों फर्मों, सीएमओ डॉ सुबोध कुमार, चारों चिकित्सा प्रभारी, वित्त एवं लेखाधिकारी और पटल सहायक को दोषी माना गया। डीएम ने मिशन निदेशक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन को पूर्व सीएमओ डॉ सुबोध कुमार सहित 11 अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की है। बताते चलें कि पूर्व सीएमओ सुबोध कुमार वर्तमान में आगरा में तैनात हैं।
ऑडिट में सामने आया गड़बड़झाला
मुजफ्फरनगर। लखनऊ से आई ऑडिट टीम ने सीएमओ ऑफिस में हुए वाहन घोटाले को पकड़ा। नियम के अनुसार एक वाहन का अधिक से अधिक 25 दिन का किराया दिया जा सकता है। जिन महीनों में होली, दीपावली की छुट्टी रही, उनमें भी 25 दिन का पैसा ही पास कर दिया गया। ऑडिट टीम ने देखा कि वाहन टेंडर में 15 लाख के लगभग क ा घपला है। अपनी रिपोर्ट मिशन निदेशक को दे दी, जिसके बाद डीएम को जांच कराने के लिए लिखा गया।