चरथावल के गांव हैबतपुर में खेत में कुएं से ईंट निकाल रहे चाचा-भतीजे की ढांग गिरने से उसके नीचे दबकर मौत हो गई। तीसरे युवक को ग्रामीणों ने बचा लिया। घटना सूचना मिलने पर पहुंची पुलिस और प्रशासन की टीम ने जेसीबी की मदद से कई घंटे की मशक्कत के बाद ढांग में दबे किसानों को बाहर निकाल कर जिला चिकित्सालय भेजा, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। दो लोगों की मौत से परिवार में कोहराम मच गया है।
चरथावल थाना क्षेत्र के गांव हैबतपुर निवासी वादिल (44) पुत्र फतेहद्दीन, उसका भतीजा फरमान (32) पुत्र लियाकत तथा सलमान पुत्र महबूब सोमवार सुबह करीब साढ़े नौ बजे अपने खेत में नलकूप के कुएं से ईंट निकालने गए थे। ईंट निकालते वक्त कुएं की ढांग अचानक भरभरा कर गिर गई, जिसके नीचे तीनों दब गए।
शोरशराबे के बाद खेतों में काम कर रहे किसान घटनास्थल पर पहुंच गए। किसानों ने सलमान को मिट्टी से बाहर खींच कर निकाला। वादिल और फरमान मलबे के नीचे दबे थे। किसानों ने घटना की सूचना पुलिस को दी।
एसडीएम सदर कुमार धर्मेंद्र, तहसीलदार रंजीत सिंह, सीओ रिजवान अहमद तथा अग्निशमन विभाग के सीओ रामशंकर तिवारी कई थानों की फोर्स के साथ बचाव कार्य के लिए हैबतपुर पहुंच गए। जेसीबी द्वारा कुएं से ढांग की मिट्टी निकाली गई। चार घंटे की कोशिशों के बाद दोनों किसानों को अचेत अवस्था में कुएं से बाहर निकाला गया।
तुरंत उन्हें स्वामी कल्याणदेव राजकीय जिला चिकित्सालय भेजा गया। इमरजेंसी में पहुंचे किसानों को चिकित्सकों ने जांच के उपरांत मृत घोषित कर दिया। चाचा-भतीजे की मौत से परिजनों पर गम का पहाड़ टूट पड़ा। गांव में ईद की खुशियां मातम में बदल गई। इंस्पेक्टर विध्यांचल तिवारी ने बताया कि पुश्तैनी कुआं करीब 50 साल पुराना था, जिसे बंद करने की योजना थी।
मौत के कुएं में खींच ले गई पुश्तैनी ईंटों की लालसा
चरथावल। 50 साल पुराने कुएं को बंद करने से पहले पुश्तैनी ईंटों को निकालने की लालसा ने चाचा-भतीजे की जिंदगी छीन ली। परिवार में दो मौत से ईद की खुशियां मातम में बदल गई है। किसान वादिल और फरमान की पत्नी और बच्चों को रो-रोकर बुरा हाल है। हैबतपुर गांव में हर तरफ शोक का मंजर है।
ईद पर सलाह मशवरे के बाद परिवार ने खेत में बने पुराने कुएं को बंद करने का फैसला किया। पुश्तैनी ईंटों को निकालने की लालसा में सोमवार को वादिल अपने भतीजे फरमान और सलमान को साथ लेकर सुबह नौ बजे ही खेतों पर निकल गया। कुएं में पानी नहीं आता था। वर्षों पूर्व उसमें समरर्सिबल बोरिंग करा दिया गया।
पानी की आपूर्ति में आ रही दिक्कतों की वजह से वादिल ने कुएं बंद करने का प्लान बनाया था। कुएं में नीचे उतरने के बाद जैसे ही पुरानी ईंटों की खुदाई शुरू की, कुएं के आसपास की मिट्टी दरकने लगी। एकाएक मिट्टी की बड़ी ढांग तीनों के ऊपर गिर गई। वादिल और फरमान नीचे काम कर रहे थे, जबकि सलमान सीढ़ी पर बीच में था।
ग्रामीणों ने जैसे तैसे उसे मिट्टी से खींच कर जान बचा दी, जबकि चाचा-भतीजे गहराई में दब गए। दो परिजनों की मौत से घर में कोहराम मचा है। वादिल की पत्नी जाहिदा का रो-रोकर बुरा हाल है। उसके घर में एक बेटी और तीन बेटे हैं। फरमान की मौत से पत्नी हारुना की आंखों के आंसू सूख नहीं रहे हैं। उसके चार बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया। हैबतपुर की गलियों में दो दिन पहले तक ईद की रौनक थी, मगर अब मातम पसरा है। ग्रामीणों के घरों में चूल्हे नहीं जले है।
चार घंटे तक चला रेस्क्यू अभियान
चरथावल। प्रशासन की त्वरित के बावजूद दो किसानों की जान नहीं बच पाई। सूचना मिलते ही एसडीएम, तहसीलदार, सीओ, अग्निशमन अधिकारी मौके पर पहुंच गए। ढांग गिरने की खबर से कई गांव के लोग हैबतपुर के जंगल में जमा हो गए।
भीड़ को संभालने के लिए फोर्स बुलानी पड़ी। जेसीबी से मिट्टी उठाई गई और कर्मचारियों और ग्रामीणों ने कुएं में उतर कर चाचा-भतीजे को बारी-बारी से बाहर निकाला। गर्मी के कारण भी रेस्क्यू ऑपरेशन में दिक्कते आई। चार घंटे तक ग्रामीण और परिजन खेत में ही डटे रहे। किसानों को बचाने का अभियान चार घंटे तक चला।
रेतीली मिट्टी बनी जान की दुश्मन
चरथावल। चार से पांच घंटे तक ढांग में दबे रहने की वजह से चाचा-भतीजे को मौत के पंजे ने घेर लिया, क्योंकि कुएं के आसपास की मिट्टी रेतीली थी। अचेत हालत में उन्हें निकाल कर तत्काल एंबुलेंस से राजकीय जिला चिकित्सालय भेजा गया, मगर तब तक दोनों की मौत हो चुकी थी।
परिजन शवों का पोस्टमार्टम नहीं कराना चाहते थे। शाम को अधिकारियों ने अस्पताल पहुंच कर परिजनों को समझाबुझा कर शांत किया। बाद में पुलिस ने दोनों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजे। अधिकारियों ने पीड़ित परिजनों को शासन प्रशासन से हर स्तर पर आर्थिक मदद का आश्वासन दिया है।