मुजफ्फरनगर। अदालत ने कैराना के कार चालक के हत्यारोपियों को साक्ष्य अभाव में बरी कर दिया। करीब 15 साल पूर्व हुई वारदात के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर-3 के पीठासीन अधिकारी रजनीश कुमार ने फैसला सुनाया। अभियोजन पक्ष की अनेक खामियां आरोपियों की बेगुनाही का कारण बनी।
बचाव पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता ठाकुर दुष्यंत सिंह ने बताया जुलाई वर्ष 2007 में कैराना निवासी कार चालक राशिद लापता हो गया था। उसी दौरान उसका शव छपार थाना क्षेत्र के रई के जंगल में बरामद हुआ था। मौके से मृतक की जेब से मिले ड्राइविंग लाइसेंस से शव की शनाख्त हुई थी। रई निवासी खेत मालिक ने मुकदमा कायम कराया था। मुकदमे का खुलासा नहीं होने पर केस की तफ्तीश डीआईजी सहारनपुर के आदेश पर 24 अगस्त 2007 को चरथावल के तत्कालीन थानाध्यक्ष सतीश राय के नाम ट्रांसफर कर दी गई थी। उन्होंने आनन फानन में मुकदमे का खुलासा करते हुए 27 अगस्त को कार बरामद दर्शाकर हत्या के आरोप में आफताब उर्फ गुल्लू निवासी बहेड़ी थाना कोतवाली एवं पुष्पेंद्र निवासी मजरा होशियारपुर गांव बधाई खुर्द थाना कोतवाली को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
पुलिस ने मामले में आरोप पत्र दाखिल किया। अदालत में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत के सामने तर्क रखा कि पुलिस ने आरोपियों की शनाख्त नहीं कराई और मृतक की कार और तमंचा भी न्यायालय में पेश नहीं किया है। अभियोजन पक्ष द्वारा 13 साक्षी पेश किए गए। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद न्यायालय ने अभियोजन कथन को संदेहपूर्ण मानते हुए दोनों आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया।