मुजफ्फरनगर। संसाधनों के अभाव में सोरम के किसान प्रवीण कुमार का खिलाड़ी बनने का सपना अधूरा रह गया। मलाल तो रहा, लेकिन देश और समाज के लिए कुछ कर गुजरने की चाह हमेशा जिंदा रखी। अपनी आठ बीघा जमीन पर कुश्ती का अखाड़ा शुरू कराया। सिर्फ छह साल में ही अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय पहलवान सोरम से निकलने लगे। खेल कोटे से नौकरियां भी युवाओं के दरवाजे तक पहुंचीं।
सोरम के प्रवीण कुमार (47) खेल और खिलाड़ी का जिक्र करते ही उत्साहित हो जाते हैं। 30 बीघा जमीन के किसान ने बताया कि बचपन से खेलों का शौक रहा। कबड्डी भी खेली और कुश्ती भी। दंगल भी कराए। पुराने जमाने में गांव तक खेलों की सुविधा नहीं थी। इसी वजह से वह सिर्फ ग्रामीण स्तर तक ही खेल पाए, लेकिन हमेशा खेलों से प्यार किया।
छह साल पहले मंसूरपुर में कुश्ती कोच गोयला गांव निवासी निर्दोष कुमार से मुलाकात हुई। किसान ने अपनी आठ बीघा जमीन निशुल्क कुश्ती अखाड़े के लिए देने पर सहमति जताई। संकल्प के साथ स्वर्णिम शुरूआत हुई। वर्तमान में चार बीघा जमीन पर अखाड़ा और दो बीघा जमीन पर हॉस्टल चल रहा है। इसी अखाड़े से निकले गौरव पहलवान ने देश का पदक दिलाने का काम किया है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोरम क्षेत्र के पहलवान अपनी छाप छोड़ रहे हैं।
75 पहलवान कर रहे हैं अभ्यास
सोरम टारगेट ओलंपिक कुश्ती एकेडमी के कोच निर्दोष बालियान बताते हैं कि गांव के गेट नंबर दो के पास अखाड़ा चला रहे है। अखाड़े में 75 पहलवान प्रशिक्षण ले रहे हैं ।
खुद को निखार रहे इन जिलों के पहलवान
अखाड़े में आगरा, मथुरा, बलिया, आजमगढ़, बनारस, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ और बागपत समेत अन्य जिलों के पहलवान प्रशिक्षण ले रहे हैं।
इस तरह कराया जाता है प्रशिक्षण
कोच निर्दोष पहलवानों को फ्री स्टाइल कुश्ती और कोच संतोष यादव ग्रीको रोमन कुश्ती की ट्रेनिंग दे रहे हैं। मिट्टी के साथ मैट भी उपलब्ध है।
इन्होंने किया नाम रोशन
रेलवे में कार्यरत अंतरराष्ट्रीय पहलवान गौरव बालियान को लक्ष्मण पुरस्कार मिल चुका है। पहलवान विवेक राष्ट्रीय स्तर पर कई पदक हासिल कर चुके हैं, अब वह बहरीन में दो जुलाई से आयोजित एशियन चैंपियनशिप में प्रतिभाग करेंगे। वीशू बालियान, यशवेंद्र, शांतनु गढ़ी, सचिन , उमंग , रिजवान तावली, दीपांशु लछेड़ा राष्ट्रीय स्तर पर खेल चुके हैं।
रंग लाई किसान की पहल : निर्दोष
कोच निर्दोष कहते हैं कि सोरम के किसान प्रवीण कुमार की पहल रंग लाई। बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उन्होंने अपनी आठ बीघा जमीन दे रखी है।
किसान के दोनों बेटे भी बने खिलाड़ी
पहलवानों की फौज तैयार कर रहे किसान प्रवीण कुमार के दोनों बेटे भी खिलाड़ी हैं। वीशू वर्तमान में रोहतक में चल रहे नेशनल कैंप का हिस्सा है। छोटा बेटा वंश कबड्डी खिलाड़ी है।
किसान ने बढ़ाया गांव का सम्मान
सोरम गांव के प्रधान करणवीर सिंह का कहना है कि किसान प्रवीण कुमार की तरह ही खेलों को बढ़ावा देने के लिए अन्य लोगों को भी आगे आना चाहिए।