हाईकोर्ट के आदेश के बाद गांवों में बदलेगी तस्वीर
चरथावल। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में आरक्षण को लेकर हाईकोर्ट के आदेश के बाद दावेदारों में खलबली मच गई है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद गांवों में घोषित आरक्षण की तस्वीर बदलेगी। ठाकुर और मुस्लिम बहुल गांवों के लोग प्रफुल्लित हैं। वहीं, सामान्य जाति के लिए चुने गांवों में बदलाव की संभावना ने लोगों में बेचैनी बढ़ा दी है। भारतीय किसान संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठा. पूरण सिंह ने हाईकोर्ट के आदेश की सराहना की है।
वर्ष 1995 के आधार को लेकर शासन ने त्रिस्तरीय चुनाव कराने के लिए आरक्षण प्रस्तावित किया था। हाईकोर्ट ने शासन के आदेश को संवैधानिक नहीं माना है। सोमवार को हाईकोर्ट के वर्ष 2015 के आधार पर आरक्षण लागू करने का आदेश आते ही पूरे प्रदेश में हलचल मच गई है। चरथावल ब्लॉक में 59 ग्राम पंचायतों में चक्रीय आरक्षण ने महारथियों के प्रधान बनने पर ब्रेक लगा दिया था। खासकर ठाकुर बहुल गांव मंगनपुर में तीन एससी वोटों पर रिजर्व करना सबको चुभ रहा था। भाकिसं के अध्यक्ष पूरण सिंह के नेतृत्व में कई गांवों में सर्व समाज की पंचायतें कर वर्ष 2024 तक हर चुनावों के बहिष्कार करने का एलान कर दिया था। उन्होंने हाईकोर्ट के आदेश का स्वागत किया है।
उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश ने सर्वसमाज के दावेदारों के चुनाव लड़ने के अरमानों को जीवित रखा है। वहीं, ठाकुर बहुल गावों में मंगनपुर, दूधली, पीपलशाह, रोनी हरजीपुर को एससी में और मुस्लिम बहुल गांव कुटेसरा, कुल्हेड़ी, सैदपुर कलां, कयामपुर, सिकंदरपुर को एससी में और चरथावल देहात, बाढ़, कछौली, दधेडू कलां, आखलौर और निरधना को ओबीसी में आरक्षित किया गया था। इन गांवों से आपत्ति भी दाखिल की गई। इन गांवों के सरफराज निरधना, विकास आर्य दूधली, विकास शर्मा रोनी हरजीनपुर और अरविंद पुंडीर पीपलशाह ने बताया कि वर्ष 2015 के अनुसार होने वाले नए आरक्षण से उम्मीद जगी है। उधर, सामान्य जाति के चुने गांवों में तस्वीर बदलने की संभावना को लेकर बिरालसी, छिमाऊ, ज्ञानामाजरा, कसौली, दीदाहेड़ी, न्यामूू, खुसरोपुर, लुहारी खुर्द, बधाई कलां आदि में दावेदारों की नींद उड़ गई है।