फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Muzaffarnagar News: बच्चों के लिए सुरक्षा चक्र है यह टीकाकरण

विज्ञापन
विज्ञापन
मुजफ्फरनगर। नियमित टीकाकरण के दौरान विरोध करने वाले 890 परिवारों में से स्वास्थ्य विभाग 483 को टीकाकरण के लिए मना कर उनका टीकाकरण करा लिया गया है। इसके लिए खुद शहर काजी तनवीर आलम का कहना है कि उपचार से पहले बचाव महत्वपूर्ण है, इसलिए किसी भी भ्रांति में न पड़ बच्चों को गंभीर बीमारियों से बचाव के लिए आवश्यक टीके लगवाना जरूरी है।
विज्ञापन

शहर सहित मोरना, सदर और शाहपुर ब्लॉक की स्थिति अच्छी नहीं रही। डीएम उमेश मिश्रा ने प्रतिरोधी परिवारों को मनाकर बच्चों का टीकाकरण कराने के लिए निर्देशित किया था। नियमित टीकाकरण अभियान के बावजूद पांच माह के दौरान जनपद के 890 परिवारों ने प्रतिरोध जताते हुए अपने बच्चों को टीका लगवाने से इंकार कर दिया था।
मई माह तक स्वास्थ्य विभाग ने यूनीसेफ की मदद से 483 परिवारों का प्रतिरोध समाप्त कराकर टीकाकरण कराया। शहरी क्षेत्र में प्रतिरोध जताने वाले 200 में से 165, मोरना में 168 में से 82, सदर में 305 में से 164 और शाहपुर क्षेत्र में प्रतिरोध करने वाले 157 में से 72 परिवारों को मनाकर बच्चों का टीकाकरण कराया जा चुका है।
विज्ञापन



टीके के बाद बुखार आने की वजह से कतराते हैं परिजन

यूनीसेफ की जिला मोबीलाइजेशन कोआर्डिनेटर तरन्नुम ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग डेढ़ साल तक के बच्चों को विभिन्न जानलेवा बीमारियों से बचाव के लिए टीका लगाता है। आम तौर से जन्म के समय बीसीजी, जन्म के 24 घंटों के भीतर हेपेटाइटिस और जन्म के छह, 10 और 14 सप्ताह पर लगने वाली रोटा वायरस वैक्सीन तक प्रतिरोध की स्थिति लगभग शून्य रहती है, लेकिन बच्चों को जैसे ही पेंटावेलेंट का पहला टीका लगता है। बहुत से परिजन उसे लगवाने से कतराते हैं। दरअसल यह वैक्सीन जांघ में लगने के बाद बच्चे को हलका बुखार आता है। उसकी जांघ भी अकड़ जाती है। इसी वजह से अभिभावक इसे लगवाने से कतराते हैं। जबकि कुछ टीके के प्रति मन में भ्रांतियां पालने के कारण विरोध करते हैं। जिन्हें मनाकर बच्चों का टीकाकरण कराया जाता है।


गंभीर बीमारियों से बचाव के लिए टीकाकरण जरूरी
एसीएमओ डॉ.प्रशांत कुमार ने बताया कि जन्म से 16 माह तक बच्चों को विभिन्न जानलेवा बीमारियों खसरा, रूबेला, जेई, हेपेटाइटिस आदि बीमारियों से बचाव के लिए प्रत्येक बुधवार और शनिवार को टीके लगाए जाते हैं। नौ से 12 माह तक के बच्चों को विटामिन ए की खुराक दी जाती है, जबकि 16 माह से 16 वर्ष तक के बच्चों को डीपीटी, ओपीवी और विटामिन ए की खुराक सहित डिप्थीरिया और टिटनेस से बचाने के लिए टीडी का टीका लगाया जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें