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राम जैसा राजा, पुत्र, भाई और मित्र
कोई दूसरा नहीं : राजराजेश्वराश्रम
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गुरुदेवेराश्रम महाराज (गुरु दत्त ब्रह्मचारी) के दूसरे निर्वाण महोत्सव में कथा के दूसरे दिन बोले जगद्गुरु शंकराचार्य
संवाद न्यूज एजेंसी
भोपा (मुजफ्फरनगर)। जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज ने कहा कि राम जैसा राजा, पुत्र, भाई और मित्र कोई दूसरा नहीं हुआ। वह शुकतीर्थ स्थित श्री दंडी आश्रम में श्री गुरुदेवेराश्रम महाराज (गुरु दत्त ब्रह्मचारी) के द्वितीय निर्वाण महोत्सव पर श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन बोल रहे थे।
स्वामी राजराजेश्वराश्रम महाराज ने कहा कि भारतीय सनातन संस्कृति के दो ही आदर्श हैं, एक श्रीराम और दूसरे श्रीकृष्ण। दोनों में अंतर भी है। श्रीराम ने जो किया उसे सबको करना चाहिए। श्रीकृष्ण ने जो कहा उसे करना चाहिए। राम को अपने जीवन आचरण में उतारने से जीवन शुद्ध, पवित्र व सभी प्रकार के विकारों से मुक्त हो जाता है। श्रीराम पिता की इच्छा को आज्ञा मानकर वनवास को चले गए जबकि वर्तमान में लोग भाई से मुकदमा जीतकर घर में पाठ करते हैं। रामचंद्र जी के वन में जाते समय उनके भाइयों द्वारा राजपाठ की बोल बना दी थी कि मुझे नहीं चाहिए, मुझे नहीं चाहिए। आज मित्रता, रिश्तेदारी पैसे के लिए सब दांव पर लग चुकी है।
जगद्गुरु ने कहा कि सांसद, विधायक पैसों में बिकते देखे जाते हैं। राम ने आदर्श मित्र के रूप में पहले सुग्रीव का कष्ट दूर किया। आज के युग में अधिकांश रूप से अच्छा मित्र उसे माना जाता है, जो दोषों की ओर आकर्षित करता है लेकिन मित्र वह है, जो दोषों को निवृत्त करे। श्री राम के राजतंत्र में लोकतंत्र था। इस देश की पहचान संतों से है।
महोत्सव में प्रयागराज के प्रसिद्ध भागवत प्रवक्ता आचार्य श्रीराम मूर्ति मिश्र ने श्रीमद्भागवत कथा का वर्णन किया। कथा का आयोजन जनार्दन स्वरूप जी महाराज गायत्री तपोनिष्ठ की ओर से किया जा रहा है। आश्रम के प्रबंधक मनोहर लाल शर्मा, पूनम राज एवं राजकुमार राज दिल्ली, संजीव कुमार शर्मा, सतीश कुमार शर्मा, गंगा दत्त शर्मा, जगदीश वशिष्ठ, पुनीत कौशिक, अवनीश कौशिक, विनोद शर्मा मौजूद रहे।