संवाद न्यूज एजेंसी
मुजफ्फरनगर। एसीएमओ की जांच में संविदा स्टाफ नर्स की बर्खास्तगी गलत साबित होने के बावजूद पद पर पुन: बहाली न किये जाने का मामला हाईकोर्ट में गूंजा। सवाल उठाए जाने पर सीएमओ कार्यालय की ओर से डीजीसी की राय लेकर हाईकोर्ट को जवाब दे दिया गया है। इस बीच पीड़िता ने गंभीर आरोप लगाते हुए विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण कोर्ट में वाद दायर कराया है।
सीएचसी चरथावल पर तैनात रही स्टाफ नर्स रूबीना से संबंधी एक वीडियो वायरल होने के बाद गठित जांच समिति ने उसकी संविदा समाप्त करने की सिफारिश की थी। इस मामले में पीड़िता की ओर से दिए गए प्रार्थना पत्र पर सीएमओ के आदेश पर कमेटी गठित कर जांच कराई गई।
गत वर्ष 21 फरवरी 2023 को अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. प्रशांत और डॉ. अरविंद की ओर से जांच आख्या प्रस्तुत की गई। इसमें संविदा स्टाफ नर्स को बहाल करने की सिफारिश की गई थी, लेकिन बहाली न होने पर पीड़िता की ओर से दिये गए प्रार्थना पत्र पर सीएमओ डॉ. सुनील तेवतिया ने तत्कालीन एसीएमओ डॉ. बिजेन्द्र कुमार से फिर से जांच कराई।
एसीएमओ ने अपनी जांच आख्या में स्टाफ नर्स की संविदा समाप्त करने के आदेश को विधि सम्मत नहीं बताया था। उन्होंने स्टाफ नर्स की बर्खास्तगी निरस्त कर पुन: उसी पद पर लिए जाने की सिफारिश सीएमओ से की थी।
-बर्खास्तगी के विरुद्ध हाईकोर्ट में लगाई थी गुहार
अलग-अलग अधिकारियों की ओर से की गई दो जांच आख्या में बर्खास्तगी पर सवाल खड़े किये जाने के बाद पद पर बहाली न होने पर स्टाफ नर्स ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जिसके उपरांत हाईकोर्ट ने 27 मार्च को आदेश पारित कर सीएमओ को मामले में उचित कार्रवाई कर दो माह के भीतर रिपोर्ट प्रेषित करने का आदेश दिया था।
सीएमओ कार्यालय के वरिष्ठ लेखाकार देवेन्द्र शर्मा ने बताया कि हाईकोर्ट के आदेश के आलोक में पूरे मामले का निगेटिव तैयार कर डीजीसी की राय सहित हाईकोर्ट को जवाब दिया गया है।
शिकायत पर भ्रष्टाचार निवारण कोर्ट भी करेगा सुनवाई
बर्खास्त की गई स्टाफ नर्स की ओर से पूर्व सीएमओ व लेखाकार के विरुद्ध न्यायालय विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में भी वाद दायर किया गया है। इसमें सुनवाई के लिए 23 मई की तिथि निर्धारित की गई है।
दायर किये गए वाद में पूर्व सीएमओ और लेखाकार के विरुद्ध भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि संविदा बहाली के नाम पर उससे आठ लाख रुपये मांगे गए।
सीएमओ कार्यालय के लेखाकार देवेन्द्र शर्मा का कहना है कि इस मामले से उसका कोई लेना देना नहीं है। उच्च अधिकारी उससे कागज तैयार कराने का जो आदेश देते हैं, वह सिर्फ उनका अनुपालन करता है।