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ईद-उल-अजहा: नहीं लगे पैठ बाजार, कुरबानी के जानवर खरीदने को लोग भटक रहे

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देवबंद में ईद-उल-जुहा की कुर्बानी के लिए बाजार में बिक्री को लाए गए बकरे - फोटो : DEVBAND
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संवाद न्यूज एजेंसी
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देवबंद। ईद-उल-अजहा (बकरीद) की रौनक बकरों से होती है। हर साल उम्दा नस्ल के बकरे पैठ बाजार की रौनक बढ़ाते हैं, लेकिन इस बार यह रौनक कोरोना की भेंट चढ़ी हुई है। शासन प्रशासन की अनुमति न मिलने से कुर्बानी के जानवर बेचने वाले व्यापारी सड़कों पर इधर उधर घूमकर ही इनकी बिक्री कर रहे हैं।
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पिछले वर्ष की तरह लोग इस बार ईद-उल-अजहा का त्योहार बेफिक्री से नहीं मना पाएंगे। वैश्विक महामारी कोरोना वायरस की वजह से शासन प्रशासन की ओर से लगाई गई पाबंदियों में रहकर ही इस वर्ष त्योहार मनाया जाएगा। महामारी के कारण इस वर्ष पैठ बाजार भी नहीं लगे हैं, जबकि हर वर्ष बकरीद से एक से डेढ़ सप्ताह पूर्व पैठ बाजार में उम्दा नस्ल के बकरे बिकने के लिए पहुंच जाते थे। जिससे पैठ बाजार की रौनक देखते ही बनती थी, लेकिन इस बार बाजार न लगने की वजह से लोगों को कुर्बानी के जानवर खरीदने के लिए इधर उधर भटकना पड़ रहा है। हालांकि कुछ पशु व्यापारी बकरा और कटड़ा आदि बेचने के लिए विभिन्न मोहल्लों में पहुंच रहे हैं, लेकिन मनमाने दाम वसूलने के चलते लोग उन्हें खरीदने से बच रहे हैं। पशु व्यापारी मो. फुरकान, तैय्यब, रिजवान आदि का कहना है कि कोरोना वायरस की वजह से पाबंदियां लगी हुई हैं। जिसके चलते उन्हें महंगे दामों पर मवेशी खरीदने पड़ रहे हैं। जिस वजह से इस बार कीमतें बढ़ी हुई हैं। उनका कहना है कि शासन प्रशासन जल्द से जल्द पैठ बाजार खोलने की अनुमित दे। उधर, नगरवासी मुदस्सिर, अकरम, शाहनवाज, शाहीन आदि का कहना है कि लॉकडाउन की वजह से कारोबार पहले से ही ठप पड़े हैं। जिसकी वजह से महंगे जानवर खरीद पाना मुश्किल हो रहा है।
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