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डॉक्टर्स डे:-मरीजों की मुस्कान ही परिवार की खुशी

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वैद्य हरिनाथ गुप्ता। (फाइल फोटो ) - फोटो : MUZAFFARNAGAR
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मरीजों की मुस्कान ही परिवार की खुशी
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मुजफ्फरनगर। मरीजों के चेहरों की मुस्कान उन्हें आत्मिक सुख देती है। चिकित्सा संग नेकी का ये सफर न सिर्फ उनके सामाजिक सरोकार पूरे करता है, बल्कि रोगियों की सेवा का संतोष भी देता है। शहर में सराफा बाजार के अहाता औलिया में तीन सदी पहले वैद्य बनारसी दास ने चिकित्सा सेवा के जिस संकल्प को प्रारंभ किया था, उसी परंपरा को आज चौथी पीढ़ी आगे बढ़ा रही है। डॉक्टर्स डे पर देश से विदेश तक चिकित्सा के फलक पर चमके परिवार की उपलब्धियों पर ‘अमर उजाला’ की एक रिपोर्ट।
125 साल से मरीजों की सेवा में समर्पित
मुजफ्फरनगर। शहर में 18वीं सदी में वैद्य बनारसी दास ने वन औषधियों के अद्वितीय ज्ञान से चिकित्सा सेवा प्रारंभ की। दक्षता ने उन्हें ‘भगतजी’ के नाम से ख्याति दिलाई। पिता से मिली विरासत को वैद्य हरिनाथ गुप्ता ने आगे बढ़ाया। ऋषिकुल आयुर्वेद कालेज, हरिद्वार से पढ़ाई में सदैव प्रथम श्रेणी रहे। वर्ष 1940 में उन्होंने श्री हरि औषधालय खोला। पत्नी लीलावती के सहयोग से समाज के हर वर्ग में उनकी नि:स्वार्थ भाव से गई चिकित्सा सेवा की यादें आज भी बुजुर्ग हो चुके मरीज नहीं भूले है। फिलहाल सवा सौ साल पुराने चिकित्सा दायित्व को छोटे पुत्र डॉ. देवेंद्र नाथ गुप्ता संभालते हैं। डीएवी कालेज से बीएससी के उपरांत उन्होंने कानपुर यूनिवर्सिटी से बीएएमएस किया है। बताते है कि उन्हें बीएचयू में एमडी आयुर्वेद हेतु प्रदेश से अकेले चयनित होने का गौरव मिला, लेकिन प्रभु को कुछ और ही मंजूर था। पिता के असमय देहावसान से उन्हें लौटकर औषधालय को संभालना पड़ा।
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दिल के मरीजों को नया जीवन दे रहे डॉ. गर्ग
मुजफ्फरनगर। वैद्य हरिनाथ गुप्ता के बड़े पुत्र डा. महेश चंद्र गर्ग देश के जाने-माने कार्डियोलॉजिस्ट है। नई दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स में दिल के हजारों मरीजों को नया जीवन दिया। एसडी इंटर कालेज के मेधावी रहे गर्ग ने कानपुर के जीएसवीएम कालेज से एमबीबीएस तथा एमडी (मेडिसन) किया। इंग्लैंड से एमआरसीपी, ग्लासगो तथा लंदन से एफआरसीपी की डिग्रियां हासिल की। अपोलो हॉस्पिटल्स कंसलटेंट फोरम के वर्ष 2012-13 में अध्यक्ष बने। डॉ. गर्ग बताते है कि दो साल पहले दिल्ली में एक रोगी विनोद कुमार का हृदय दो टुकड़ों में फट गया। स्थिति इतनी गंभीर थी, मगर अपनी टीम के साथ विस्मयकारी तरीके से शल्य क्रिया से उनकी जान बचाई।
कार्डियक एमआरआई में डॉ. पंकज को कामयाबी
मुजफ्फरनगर। चौथी पीढ़ी में डॉ. महेश चंद्र के बड़े पुत्र डॉ. पंकज गर्ग सैफील्ड इंग्लैंड में हार्ट स्पेशलिस्ट हैं। रूस से एमडी करने के बाद उन्होंने इंग्लैड से मेडिसन और कार्डियोलॉजी में एमआरसीपी किया। उन्हें विश्व में पहली बार एमआरआई में पीएचडी करने का श्रेय मिला। इसी वर्ष जनवरी में दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में 39वें इंटरनेशनल कंवेंशन ऑफ नान रेजिडेंट इंडियंस में डॉ. पंकज को हिंद रत्न अवार्ड से नवाजा गया।
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इंग्लैंड में चमक रहे डॉ. दिव्य
मुजफ्फरनगर। डॉ. दिव्य गर्ग ने इंटर एसडी पब्लिक स्कूल से की और सीबीएसई की मेरिट में नार्थ जॉन में टॉप किया। गुजरात के जामनगर से एमबीबीएस कर वह अपोलो हॉस्पिटल दिल्ली में रेजिडेंट डॉक्टर रहे। उन्होंने इंग्लैड से लगातार तीन साल में एमआरसीपी कर रिकार्ड बनाया। फिलहाल वे इंग्लैंड बर्मिंघम के वूस्टर हॉस्पिटल में सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर है, जबकि उनकी पत्नी डॉ. सुरुचि गर्ग डेंटल सर्जन है। पिता डॉ. देवेंद्र नाथ गुप्ता एवं मां रेखा गुप्ता कहती है कि घर में जब स्वजन बातें करते है, अक्सर रोगियों की ही बातें होती है।

डॉ देवेंद्र नाथ गुप्ता।- फोटो : MUZAFFARNAGAR

डॉ महेशचंद्र गर्ग।- फोटो : MUZAFFARNAGAR

डॉ पंकज गर्ग।- फोटो : MUZAFFARNAGAR

डॉ दिव्य गर्ग और डा सुरभि गर्ग।- फोटो : MUZAFFARNAGAR

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