छपार (मुजफ्फरनगर)। गांव बसेड़ा में पट्टे की जमीन को 47 साल बाद सरकारी बताए जाने पर विवाद खड़ा हो गया है। राजस्व विभाग की टीम ने शुक्रवार को जमीन को सरकारी बताते हुए उस पर सरकारी संपत्ति होने का बोर्ड लगाने की तैयारी शुरू कर दी। रात में कश्मीरा (70) की मौत हो गई। परिजनों और ग्रामीणों का कहना है कि सदमे से उनकी मौत हुई है।
बसेड़ा गांव में बिजलीघर के पीछे तीन बीघा जमीन में अनुसूचित जाति के लोगों की बस्ती हैं। यहां के लोगों का कहना है कि वर्ष 1975 में गांव प्रधान फूल सिंह ने 12 प्लाट अनुसूचित जाति के कश्मीरा, धर्म भीरू, पाल्ला, रेशमा, सूत्री, महक सिंह, कृष्णपाल, ऋषिपाल, रामपाल को आवंटित किए थे। कुछ लोगों ने वहां पर अपने मकान बना लिए और कुछ ने खाली नींव भरकर छोड़ा हुआ हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले कई दिनों से राजस्व विभाग के कर्मचारी और लेखपाल बस्ती में आ-जा रहे हैं। लेखपाल शुक्रवार को भी बस्ती में पहुंचे थे। उन्होंने ग्रामीणों से कहा था कि यह जमीन सरकारी हैं, इसलिए भूमि को खाली कर दें।
ग्रामीणों का कहना है कि यह बात कश्मीरा को भी पता चली तो शुक्रवार रात सदमे से उसकी मौत हो गई। ग्रामीणों का कहना हैैै कि उनके मकान कभी भी ध्वस्त किए जा सकते हैं। ऐसे में वह कहां जाएंगे।
लेखपाल सियानंद ने बताया कि एसडीएम सदर के आदेश के बारे में लोगों को बताया है। उन्होंने सिर्फ नए निर्माण कार्य के लिए मना किया है। बने हुए मकान गिराने के लिए नहीं कहा था। एसडीएम सदर परमानंद झा का कहना है कि अभी कोई बोर्ड मौके पर नहीं लगाया है। शनिवार को कोई कर्मचारी या अधिकारी गांव में नहीं पहुंचा। वह मामले की जानकारी जुटा रहे हैं।