लीज समाप्त होने के बाद भी सोया रहा वन विभाग
मुजफ्फरनगर। पीर खुशहाल को आवंटित जमीन की लीज का समय 15 साल पहले पूरा होने के बाद भी वन विभाग ने जमीन को खाली कराने का प्रयास नहीं किया। केंद्रीय पशुधन राज्यमंत्री डॉ संजीव बालियान ने इस मामले में संजीव बालियान ने डीएम को पत्र लिखकर सरकारी जमीन खाली कराने के लिए कहा। इसके बाद प्रशासन ने जमीन खाली कराने की प्रक्रिया शुरू की।
पीर खुशहाल की जमीन के मामले को लेकर केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान ने 19 अगस्त 2020 को जिलाधिकारी सेल्वा जे को एक पत्र लिखा। इस पत्र में कहा गया कि वर्ष 1975 में दी गई जमीन का 30 साल का लीज का समय जमीन के आवंटन का समय 31 अक्तूबर 2005 को पूरा हो गया। पीर खुशहाल की मृत्यु भी हो चुकी है। कोर्ट में भी इस जमीन का लेकर कोई मामला नहीं है। प्रशासन वन विभाग की इस जमीन को तत्काल खाली कराए। केंद्रीय राज्यमंत्री बालियान के पत्र के बाद वन विभाग ने उक्त जमीन पर एक नोटिस चस्पा किया, जिसमें कहा गया कि जमीन वन विभाग की है। पीर खुशहाल की पत्नी पिरानी नाजिया अफरीदी और प्रबंधक सूफी जव्वाद को जमीन खाली करने के लिए इसके बाद एक दूसरा नोटिस जारी हुआ।
बालियान ने फोन करके भी पूछा था किसके दबाव में है प्रशासन
संजीव बालियान ने इस मामले में डीएम और डीएफओ दोनों को फोन करके पूछा कि जमीन को खाली नहीं कराने के पीछे किसका दबाव है। प्रशासन किस बात के दबाव में है।
पहले दिन ढाई घंटे ही चली कार्रवाई
मोरना(मुजफ्फरनगर)। वन विभाग की जमीन को कब्जा मुक्त कराने के लिए पीर खुशहाल के बिहारगढ़ स्थित चिल्लागाह में पहले दिन केवल ढाई घंटे की कार्रवाई हुई। इस दौरान जेसीबी से चिल्लागाह दस कमरों के आगे का हिस्सा जेसीबी से ध्वस्त कराया गया।
बिहारगढ़ स्थित पीर खुशहाल की चिल्लागाह को वन विभाग की जमीन से कब्जा मुक्त कराने की कार्रवाई गोपनीय रखी थी। बुधवार सुबह पहले अफसर भोपा थाने में एकत्र हुए। यहां पर डीएफओ सूरज कुमार, एडीएम प्रशासन अमित सिंह, एसपी देहात नेपाल सिंह, एसडीएम जानसठ अजय अम्बष्ट ने पहले जमीन कब्जा मुक्त कराने की कार्रवाई की योजना बनाई। इसके साथ ही भोपा, ककरौली, रामराज थानों और आरआरएफ बुुला कर भारी मात्रा में पुलिस बल एकत्र किया। इसके बाद अधिकारियों की टीम करीब तीन बजे तीन जेसीबी लेकर बिहारगढ़ के चिल्लागाह पर पहुंची। पीर खुशहाल की पत्नी नाजिया अफरीदी के विरोध को अनसुना कर दिया। चिल्लागाह के प्रबंधक सूफी जव्वाद ने कुछ कागजात भी दिखाए, जिन्हें अधिकारियो ने हाई कोर्ट के आदेश का हवाला देकर उन्हें मानने से इंकार कर दिया। पहले दिन करीब ढाई घंटे प्रशासन की कार्रवाई चली। इस दौरान चिल्लागाह में बने 40 कमरों से से 10 कमरों के आगे का हिस्सा और बरामदा ध्वस्त कर किया गया। साढ़े पांच बजे अधिकारियों की टीम लौट गई।
आज फिर से ध्वस्तीकरण की कार्रवाई होगी
मोरना। चिल्लागाह में वर्तमान में 40 कमरे है, जिनमें लोग ठहरते है। पहले दिन दस कमरों के आगे के हिस्से को ध्वस्त किया गया। एडीएम प्रशासन अमित सिंह ने बताया कि यह कार्रवाई जारी रहेगी। पूरी जमीन को खाली कराना है, यहां जो भी निर्माण है उसे ध्वस्त किया जाएगा। बृहस्पतिवार सुबह से ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी। पहले दिन फोर्स एकत्र करने में समय लग गया, इसलिए बृहस्पतिवार को सुबह से ही जमीन को कब्जा मुक्त कराने की कार्रवाई की जाएगी।
ग्रामीणों की भीड़ लगी
पुलिस ने खदेड़ा
मोरना। बिहारगढ़ चिल्लागाह पर प्रशासन की कार्रवाई होने पर मौके पर ग्रामीणों की भीड़ एकत्र हो गई। प्रशासन के लाव लश्कर को देखकर ग्रामीणों में उत्सुकता बढ़ गई। मौके पर ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई। जिस पर पुलिस ने उन्हें समझाने का प्रयास किया, मगर वो नहीं माने, तब पुलिस ने उन्हें वहां से खदेड़ दिया। अफसरों का आशंका थी कि ग्रामीण इस कार्रवाई के विरोध में सामने न आए जाए।
हाई कोर्ट से नहीं मिली थी राहत
मोरना। पीर खुशहाल के नाम वन विभाग की जमीन को वर्ष 1975 में तीस साल के लिए लीज पर दिया गया था। यह अवधि 2005 में पूरी हो गई। इसके बाद पीर खुशहाल ने लीज को बढ़वाने का प्रयास किया लेकिन लीज नही बढ़ी थी। एडीएम प्रशासन अमित सिंह ने बताया कि मामला हाई कोर्ट इलाहाबाद चल गया था। वहां से भी पीर खुशहाल का राहत नहीं मिली थी। हाई कोर्ट ने 2016 में वन विभाग के पक्ष में निर्णय दिया था।