शुकतीर्थ/मोरना। भागवत भूमि पर सजे कार्तिक गंगा स्नान मेला अद्भुत...अविस्मरणीय और श्रद्धा भक्ति के भावों से भर गया है। गंगा तट के किनारे दूर तक तंबुओं की नगरी बस गई है। रंग-बिरंगी तंबुओं की अनोखी छटा बेहद दर्शनीय दिख रही है। महिलाओं ने मंगल गीतों के बीच गंगा घाट पर पूजन किया।
मुख्य गंगा स्नान के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं ने गंगा क्षेत्र मैदान में दूर तक तंबुओं का बसेरा बना लिया। श्रद्धालु महिलाएं भजन और मंगल गीत गा रही है। युवा किसान रागनी और हरियाणवी गीतों पर झूम रहे हैं। स्वामी कल्याणदेव मुख्य द्वार के आगे ग्रामीणों के डेरे लग चुके हैं। फिरोजपुर और बहुपूरा , भोकरहेड़ी के रास्ते शुकतीर्थ पहुंचे श्रद्धालुओं का सतगुरु समनदास आश्रम से शिवधाम तक डेरा है।
मोरना से बिहारीगढ़ पहुंचे श्रद्धालुओं ने शुकदेव पार्क एवं नक्षत्र वाटिका से पहले तम्बू नगरी बसा ली है। बच्चे मेले में झूले और अन्य खेलों का आनंद ले रहे हैं। विश्वकर्मा मंदिर से हनुमतधाम तक बाजार सजे हैं। डीएम उमेश मिश्रा ने निरीक्षण के बाद संस्कृत के श्लोकों से गंगा मैया और तीर्थवासी संतों को नमन किया।
गंगा घाट पर भागवत कथा में आए श्रद्धालु श्रद्धा और भक्ति से अनुष्ठान में लगे हैं। भगवताचार्याें के साथ गंगा जल के कलश लेकर भक्त श्री शुकदेव आश्रम पहुंचे। श्रद्धालु महिलाएं लड्डू गोपाल को गंगा में स्नान को लाई हैं।
मेले में सनातनी ही दुकान लगाएं : यशवीर महाराज
मोरना। शुकतीर्थ कार्तिक गंगा स्नान मेले में योग साधना बघरा पीठाधीश्वर स्वामी यशवीर महाराज ने समर्थकों के साथ गंगा मेले में भ्रमण किया। हिंदू दुकानदारों को भगवान वाराह के चित्र वितरण किए। उन्होंने कहा शुकतीर्थ गंगा स्नान का मेला सनातन धर्म का है। इसमें केवल सनातनी ही दुकान लगाएंगे। कोई भी थूक-मूत्र षड्यंत्रकारी गैंग का सदस्य सनातनियों के मेले में दुकान न लगाए। पिछले वर्ष भी यह अभियान मेले मे चलाया गया था।
सूना मीना बाजार... मेले में ग्राहक नहीं
मोरना। बिजनौर के कारीगर सोमपाल, मिथलेश ने बताया कि उनके परिवार के लोग कडी मेहनत कर फर्नीचर को बनाते हैं। मेलों में दुकानें लगाकर देसी फर्नीचर बेचते हैं। अभी तक अपेक्षाकृत बिक्री शुरू नहीं हो पाई है। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ होने के बावजूद मीना बाजार खाली व सुनसान पड़ा है। दुकानदार राकेश विश्वकर्मा, राजकुमार ने बताया कि इस वर्ष मेले से दुकानदारों को काफी उम्मीदें थीं लेकिन मीना बाजार में श्रद्धालुओं के न आने से दुकानदार मायूस हैं।
प्रदर्शनी नहीं लगने के कारण किसान मायूस
मेला ग्राउंड पर प्रतिवर्ष लगने वाली किसान प्रदर्शनी व सरकारी स्टॉल नहीं लगने से मेले की रौनक फीकी पड गई है। किसानों में निराशा देखी जा रही है। यह प्रदर्शनी किसानों के लिए नई तकनीक व उन्नत बीजों से रूबरू होने का एक महत्वपूर्ण मंच हुआ करती थी। किसान मायूस हैं बल्कि मेले में आने वाले किसानों को भी कृषि उत्पादों व उपकरणों की विविधता देखने का अवसर नहीं मिल पा रहा है। उधर, सनोज कुमार प्रजापति ने बताया कि पंचायतीराज विभाग मोरना ब्लॉक की ओर से जैविक खाद को बढावा देने के लिए जागरूकता अभियान चलाया गया है।
मेले की शोभा बनी थी मां आनन्दमयी और संत देवरहा बाबा
मोरना। भागवत धरा पर कार्तिक गंगा स्नान मेले में मां आनन्दमयी और देवरहा बाबा जैसी उच्चकोटि की महान विभूतियां पधारीं थीं। श्री श्री मां आनन्दमयी निष्काम कर्मयोगी संत स्वामी कल्याणदेव को स्नेह में पिता श्री कहती थीं। पीठाधीश्वर स्वामी ओमानन्द महाराज बताते हैं कि कार्तिक पूर्णिमा पर्व पर बंगाल से मां आनन्दमयी भागवत पीठ श्री शुकदेव आश्रम में दो बार पधारीं थीं। 1956 में कार्तिक मेले में वृंदावन से संत देवरहा बाबा शुकतीर्थ पधारे थे और चार दिन मचान बनाकर मेले में आए श्रद्धालुओं को आशीर्वाद दिया था। कार्तिक पूर्णिमा गंगा स्नान पर्व पर ही स्वामी कल्याणदेव महाराज ने अक्षय वृक्ष टीले पर श्री शुकदेव मंदिर निर्माण की आधरशीला रखी थी।
शुक तीर्थ गंगा घाट पर गंगा स्नान की यादों की मोबाईल सेल्फी लेते गाजियाबाद के श्रद्धालु। संवाद
शुक तीर्थ गंगा घाट पर गंगा स्नान की यादों की मोबाईल सेल्फी लेते गाजियाबाद के श्रद्धालु। संवाद
शुक तीर्थ गंगा घाट पर गंगा स्नान की यादों की मोबाईल सेल्फी लेते गाजियाबाद के श्रद्धालु। संवाद