देशभर में फिल्म पद्मावत के प्रदर्शन से पहले उठे भूचाल से लोग सकते में हैं। पूरे देश में विरोध-प्रदर्शन के बीच बृहस्पतिवार को पद्मावत रिलीज हो रही है। फिल्म पद्मावत के गीतकार एएम तुराज का मानना है कि संजय लीला भंसाली की मूवी में राजपूतों की आन, बान और शान को फिल्माया गया है। इसमें रानी पद्मावती के शौर्य और मर्यादा को देखा जा सकेगा। फिल्म देखने के बाद विरोध खुद शांत हो जाएगा।
मुजफ्फरनगर जिले के जानसठ तहसील के गांव संभलहेड़ा निवासी गीतकार और शायर एएम तुराज ने डायरेक्टर संजय लीला भंसाली की बहुचर्चित फिल्म पद्मावत के सारे गीत लिखे हैं। रानी पद्मावती यानि दीपिका पादुकोण पर फिल्माए गए गीत ‘घूमर’ ने दुनिया में धूम मचा रखी है। यू-ट्यूब पर यह गाना 9.54 करोड़ से ज्यादा लोग देख चुके हैं।
फिल्म के रिलीज से पहले बुधवार को गीतकार तुराज ने अमर उजाला से बातचीत की। तुराज ने बताया कि फिल्म पद्मावत में राजपूतों का गौरव, शौर्य और पराक्रम प्रदर्शित किया गया है। राजपूताना इतिहास को देश की भावी पीढ़ी के समक्ष रखा गया है। फिल्म देखने के बाद देश में हो रहा विरोध समाप्त हो जाएगा।
फिल्म के ट्रेलर, पोस्टर और गानों को दर्शकों का भरपूर रेस्पांस मिला है। भंसाली और उनकी टीम ने फिल्म के निर्माण और तथ्यों को सहीं तरीके से रखने में कड़ी मेहनत की है। बताया कि डायरेक्टर ने उन्हें घूमर गीत लिखने की चुनौती दी थी, जिसे उन्होंने बखूबी स्वीकार किया। राजस्थान में काफी वक्त बिताया और घूमर नृत्य की संस्कृति को समझा।
गीत में पोएट्री का भी प्रयोग किया गया, जैसे धनक वाली पंक्ति में पोएट्री है। प्रेमगाथा पर लिखे गीत ‘एक दिल एक जान’ ने रानी के दर्द को उकेरा है। काव्य के दम पर यह गीत भी सभी को भा रहा है। अभिनेत्री दीपिका ने खुद गाने की तारीफ की है। फिल्म के सभी गानों का खुद संजय लीला भंसाली ने म्यूजिक कंपोज किया है। फिल्म में कुल पांच गीत हैं।
संभलहेड़ा से बॉलीवुड तक का सफर
मुजफ्फरनगर। मुशायरे से बॉलीवुड के मंच तक चमके शायर और गीतकार एएम तुराज को जितनी उर्दू और अरबी की समझ है, उतना ही वे हिंदी काव्य को अपने दिल में बसाए हैं। गांव संभलहेड़ा में 19 सितंबर 1975 को जन्मे तुराज के पिता वहीद किसान हैं। जानसठ के डीएवी इंटर कॉलेज से इंटरमीडिएट उत्तीर्ण करने के बाद ग्रेजुएशन किया।
विद्यार्थी जीवन में ही शायरों, कवियों को पढ़ने का शौक लग गया। धीरे-धीरे उर्दू शायरी में मन रमा तो वे मुशायरों में दाद पाने लगे। बड़े मकसद के लिए तुराज ने मुंबई की राह पकड़ी। वर्ष 2006 में फिल्म ’कुड़ियों का है जमाना’ में उन्होंने गीत लिखे।
फिल्म ‘खल्लास’, ‘वादा रहा’, ‘जेल’ और ‘जैकपॉट’ के लिए भी तुराज ने गीत लिखे है। संजय लीला भंसाली को तुराज के गीत खूब भाए। फिल्म पदमावत से पहले वह गुजारिश, बाजीराव मस्तानी के लिए भी गीत लिख चुके हैं।