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जनपद के खेतों में है एक करोड़ 15 लाख क्विंटल गन्ना

Wed, 11 Apr 2018 11:29 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/मुजफ्फरनगर
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खेत में खड़ी गन्ने की फसल। - फोटो : अमर उजाला
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जिले के किसानों के खेतों में अभी भी एक करोड़ 15 लाख क्विंटल गन्ना मौजूद है। गन्ना विभाग द्वारा कराए गए सर्वे में यह तथ्य सामने आया है। सर्वे पर यकीन किया जाए तो इस गन्ने की पेराई में चीनी मिलों को अभी एक माह से ज्यादा लगेगा। वहीं, किसानों ने गन्ना विभाग के सर्वे पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि सभी किसानों के खेतों का सर्वे नहीं हुआ है और पर्ची का संकट अभी भी बना हुआ है।  
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जिले में इस बार गन्ने की बंपर फसल हुई है। जनपद के किसानों के खेतों में एक करोड़ 15 लाख क्विंटल गन्ना अभी भी मौजूद है। गन्ना विभाग ने जिले के सभी गांवों का सर्वे किया है। सर्वे में यह तथ्य सामने आया है। इस सर्वे के आधार पर ही किसानों को सोसायटी पर्ची जारी करेगी।

जिला गन्ना अधिकारी ओम प्रकाश यादव ने बताया कि उनके विभाग की टीमों ने प्रत्येक गांव जाकर सर्वे किया है। खेतों में जो गन्ना खड़ा है, जिले की चीनी मिलों की पेराई की क्षमता के हिसाब से इसकी पेराई में एक माह से अधिक लगेगा। जिले की सभी आठ चीनी मिलें एक दिन में साढे चार लाख क्विंटल गन्ने की पेराई कर रही है। दस मई से पहले किसी चीनी मिल के बंद होने की उम्मीद नहीं है।
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बीते वर्ष चीनी मिलों में 19 से लेकर 29 अप्रैल के बीच पेराई बंद हो गई थी। जब तक किसान के खेत में गन्ना रहेगा चीनी मिल चलेगी। सहकारी चीनी मिल मोरना सबसे लास्ट में बंद होगी। डीसीओ ने बताया कि सर्वे के आधार पर ही किसानों को गन्ना सोसायटियों से पर्ची जारी की जाएगी। दूसरी तरफ, जिले के किसानों के सामने पर्ची की समस्या अभी भी निरंतर बनी है।

भाकियू के जिलाध्यक्ष राजू अहलावत ने गन्ना विभाग के सर्वे पर ही सवाल उठाया है। उनका कहना है कि उनके गांव भैंसी में अभी तक सर्वे नहीं हुआ है। जिले के अन्य गांवों की भी यहीं स्थिति है। ऐसे हालात में किसानों के सामने पेराई सत्र के अंत में गन्ना डालने की मारामारी रहेगी। पर्ची की समस्या का निराकरण विभाग अभी तक नहीं कर पाया है।  

चीनी मिलों पर 740 करोड़ बकाया 
मुजफ्फरनगर। जिले की चीनी मिलों पर किसानों का बकाया लगातार बढ़ रहा है। चीनी मिलों में किसान अब तक 25 अरब 38 करोड़ का गन्ना डाल चुके हैं। किसानों को मिलों ने 17 अरब 98 करोड़ का भुगतान कर दिया है। 740 करोड़ मिलों पर बकाया है।

सबसे ज्यादा भैंसाना चीनी मिल पर 260 करोड़ रुपये है। खतौली पर 144 करोड़, तितावी पर 107 करोड़, मंसूरपुर पर 80 करोड़, टिकौला पर 14 करोड़, खाईखेड़ी पर 77 करोड़, रोहाना पर 23 करोड़, मोरना पर 31 करोड़ बकाया है। टिकौला ही ऐसी चीनी मिल है जो किसानों का 14 दिन से पहले भुगतान कर रही है। बाकी सभी मिल फिसड्डी है।  

चीनी उत्पादन में रिकार्ड टूटा 
मुजफ्फरनगर। वर्ष 2016-17 में चीनी मिलों ने किसानों से 763 लाख 22 हजार क्विंटल गन्ना खरीदा था और 80 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन किया था। किसानों को कुल भुगतान 23 अरब 80 करोड़ का किया गया था।

दस अप्रैल तक जिले की चीनी मिलों ने गत वर्ष से 21 लाख क्विंटल अधिक  794 लाख 67 हजार क्विंटल गन्ने की पेराई कर डाली। चीनी का बीते वर्ष से सात लाख 85 हजार कुंतल अधिक 87.85 लाख कुंतल चीनी का उत्पादन किया। किसानों ने 25.38 अरब का गन्ना खरीदा।  
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