खतौली। हरिद्वार से चलकर दिल्ली में किसान घाट पर पहुंचने वाली भाकियू की किसान क्रांति यात्रा को मंगलवार सुबह गाजीपुर बार्डर पर रोक दिया गया था। केंद्र सरकार ने दिल्ली के अंदर किसानों के प्रवेश पर पाबंदी लगा दी थी। किसानों ने बताया कि गाजीपुर बार्डर पर पुलिस ने ज्यादती की। वहां का मंजर देखकर लगता था कि शायद जान नहीं बचेगी। पुलिस की इस जुर्म ज्यादती को सहने के बावजूद किसान पीछे नहीं हटे। किसानों ने अपनी जान की परवाह किए बिना पुलिस प्रशासन से हर मोरचे पर डटकर मुकाबला किया।
जानसठ के गांव मकसूदाबाद निवासी भाकियू ब्लाक अध्यक्ष बिटटू ठाकुर ने बताया कि ऐसे लग रहा था कि अब जान नहीं बचेगी। बार्डर के पास से गुजरने वाले आगरा एक्सप्रेस-वे पुल भी आंसू गैस के गोलों के धमाकों से दहल गया था। ऐसा लग रहा था कि पुल भी टूटकर किसानों के ऊपर गिर सकता है। इसके बावजूद जान की परवाह किए बिना किसान पुलिस से डटकर मुकाबला करते रहे, जिसको लेकर भाकियू ने भाजपा की केंद्र व प्रदेश सरकार को अपनी ताकत का अहसास करा दिया।
मंगलवार की रात तक किसान बार्डर के पास ही डेरा डाले रहे। रात के 12 बजे राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत व राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने किसानों से आह्वान किया वे अब किसान घाट जाएंगे। रात में किसानों ने किसान घाट पर कूच किया। किसान घाट पहुंचकर किसान क्रांति यात्रा का समापन किया गया।
दिल्ली पुलिस ने ठीक कराए ट्रैक्टर ट्रॉली
किसान बिट्टू ठाकुर ने बताया कि दिल्ली में गाजीपुर बार्डर पर पुलिस ने किसानों की ट्रैक्टर ट्रॉलियों में तोड़फोड़ करते हुए टायरों में सूआ घोंपकर पंक्चर कर दिए थे। केंद्र सरकार के आदेश पर दिल्ली पुलिस ने बुधवार की सुबह ट्रैक्टर ट्रॉलियों को अपने पैसों से ठीक कराया और पहियों में नई ट्यूब डलवाई। इसलिए ट्रैक्टर ट्रॉलियों में सवार किसानों को दिल्ली से आते आते शाम हो गई थी।
भाजपा नेताओं को गांव में घुसने नहीं देंगे
गांव ठस्का, तहसील रुड़की, जिला हरिद्वार के किसान बबलू, राजकुमार, राज कमल, संजीव, दीपक राणा, आनंद राणा, गोविंद राणा, मनोज कुमार, राजपाल सिंह, सुखबीर, जसबीर, कालूराम आदि ने मंसूरपुर में हाईवे पर बातचीत करते हुए कहा कि प्रदेश में केंद्र सरकार ने किसानों के साथ ज्यादती की है। किसान भाजपा नेताओं व कार्यकर्ताओं को अपने गांव में घुसने नहीं देंगे। उन्हें काले झंडे दिखाए जाएंगे। दस दिन की यात्रा किसानों ने शांतिपूर्वक पूरी की। बीच में कोई झंझट पैदा नहीं हुआ। दिल्ली बार्डर पर किसानों को सरकार ने सोची समझी रणनीति के तहत रोक दिया। किसानों ने अपनी ताकत का एहसास कराते हुए मंगलवार की रात को एक बजे किसान घाट पर पहुंचे।