मुजफ्फरनगर। तितावी क्षेत्र के मांडी गांव के राजबीर हत्याकांड में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से मुजफ्फरनगर की पिछले 16 साल की तस्वीर भी अदालत में पेश की गई। वारदात के वक्त के हालात, मुजफ्फरनगर दंगा, गैंगस्टर विक्की त्यागी की कोर्ट में हत्या और भौकाल वेब सीरीज का जिक्र किया। अदालत ने यह भी कहा कि अब तस्वीर बदल गई है, जिले की पहचान अब उद्योगों से हो रही है।
सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी कुलदीप कुमार ने ट्रायल के दौरान तर्क प्रस्तुत किया कि जिस समय राजबीर सिंह की हत्या हुई, तब तमाम गैंगों का आतंक था और भाड़े पर हत्याएं होती थी। मुजफ्फरनगर की छवि क्राइम कैपिटल की बन गई थी। पश्चिम उत्तर प्रदेश के कई गिरोह जिले में प्रभाव रखते थे। गन्ना बेल्ट होने के कारण आर्थिक हितों, ठेकों और भूमि विवादों से जुड़े हिंसक संघर्ष भी होते रहते थे।
क्षेत्र में उस समय राजनीतिक संरक्षण और अपराध के गठजोड़ की चर्चा होती रही। 2013 के सांप्रदायिक दंगों में कई लोगों की हत्याएं हुई। गैंगस्टर विक्की त्यागी की 16 फरवरी 2015 को कोर्ट में गोली मारकर हत्या कर दी गई। जिले से जुड़ी भौकाल वेब सीरीज में एक पुलिस अधिकारी के अपराध नियंत्रण की कहानी भी दिखाई गई है।
फैसले में लिखा कि वर्तमान समय में पुलिस अभियानों, कानून व्यवस्था में सुधार और अपराधियों के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस पॉलिसी, फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन से स्थिति में बदलाव है। अपराध की दर में कमी आई है। वर्तमान में मुजफ्फरनगर जनपद की छवि विशाल औद्योगिक इकाइयों और धार्मिक ऐतिहासिक विरासत के रूप में होती है।