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सच्चे गुरु की आज्ञा सर्वोपरि होती है : अरह सागर महाराज

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संवाद न्यूज एजेंसी
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खतौली। अरह सागर महाराज ने बताया कि किसी के चरित्र और व्यवहार में कमी निकालना सरल कार्य है। हमें राग नहीं वीतरागता की ओर बढ़ना है। स्वयं के कार्य और आचरण देखों। सच्चे गुरु की आज्ञा सर्वोपरि होती है।

बिददीबाड़ा स्थित जक्की वाला मंदिर में अरह सागर महाराज का प्रवास चल रहा है। बृहस्पतिवार को अरह सागर महाराज ने बाजार क्षेत्र स्थित जैन मंदिरों का भ्रमण किया। सराफान जैन मंदिर में अभिषेक और शांति धारा का धार्मिक कार्य कराया।
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प्रवचन सभा में अरह सागर महाराज ने बताया कि परपीड़ा से करुणा की परीक्षा होती है। महापुरुषों के भी जीवन में विपत्ति आती है। सामाजिक समरसता का भाव ग्रहण करना है। धर्म किसी के साथ भेदभाव नहीं रखता। अहिंसा सबसे बड़ा धर्म है। जिनके आचार विचार अच्छे होते हैं, उन्हें हर स्थान पर सम्मान मिलता है।
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इस अवसर पर प्रदीप, धन कुमार, विवेक, राजीव मुखिया, सतीश, सुदेश, राजीव लोहिया, पिंकी, निशा, सोनिया, प्रीति दादरी, विजय, अरविंद, मनोज, अरविंद, शशि, अन्नू, सावित्री, वीरेश, अजय, अरुण, सुनील, संजय, करुणा आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम संयोजन संजय दादरी ने किया। धर्मसभा संचालन में सुशील ने बताया कि पांच जून को भव्य स्तर पर शांतिविधान का आयोजन होगा।
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