मुजफ्फरनगर पालिका
- पालिका में 11 गांव शामिल होने के बाद अब मतदाता चार लाख के पार
- पिछले दो चुनाव में कांग्रेस की जीत से भाजपा की राह मुश्किल
अमर उजाला ब्यूरो
मुजफ्फरनगर। सीमा विस्तार के बाद मतदाताओं की संख्या के लिहाज से विधानसभा से बड़ी बन गई शहर पालिका का जातीय गणित साधना राजनीतिक दलों के लिए चुनौती साबित होगा। विधानसभा के मुकाबले करीब 65 हजार मतदाता इस बार पालिका में अधिक हैं। पिछले पालिका चुनाव से तुलना करें तो एक लाख 61 हजार 492 मतदाता बढ़ गए हैं।
साल 2011 की जनगणना में नगरीय क्षेत्र की 3.92 लाख की आबादी सीमा विस्तार के बाद करीब 5.60 लाख पहुंच गई है। साल 2017 के पालिका चुनाव की बात करें तो शहर पालिका में मतदाताओं की संख्या 259927 थीं। विस्तार के बाद इस बार मतदाताओं की संख्या 421419 पहुंच गई है। मतदाताओं की संख्या में बढ़ोत्तरी से जातीय राजनीति का गणित भी बदलने की संभावना है। शहर पालिका में अन्य पिछड़ा वर्ग और मुस्लिम मतों की संख्या सबसे ज्यादा बढ़ी है। ऐसे में राजनीतिक दलों को टिकट बंटवारे में भी जातीय गणित साधने में चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
ये गांव हुए पालिका में शामिल
नगर पालिका में वहलना, सूजडू, मीरापुर, मंधेड़ा, खांजापुर, शहाबुद्दीनपुर, सरवट, कूकड़ा, अलमासपुर, बीबीपुर और सहावली गांव को पालिका में शामिल कर लिया गया है।
पालिका में 39 से बढ़कर हुए 55 वार्ड
शहर पालिका में इस बार वार्ड 55 हो गए हैं। पहले 39 वार्ड थे।
दो बार लगातार हारी भाजपा
शहर पालिका सीट पर भाजपा लगातार दो बार हार चुकी है। साल 2012 में उद्यमी पंकज अग्रवाल कांग्रेस के टिकट से जीत चुके है। 2017 में अंजू अग्रवाल ने भी कांग्रेस के टिकट पर जीत दर्ज की थी। जीत के बाद अंजू अग्रवाल भाजपा में शामिल हो गई, लेकिन पूरे कार्यकाल में वह विवादों में घिरी रहीं।