मुजफ्फरनगर। कांवड़ यात्रा के दौरान एनएच-58 पर यात्री वाहनों का संचालन बंद करने से रोडवेज को एक करोड़ का नुकसान उठाना पड़ा हैं। जिले भर में रूट डायवर्जन के कारण कुल 266 बसों में से आधी डिपो में खड़ी करनी पड़ी थी। परिवहन निगम के आंकड़ों के अनुसार 80 लाख रुपये का मुजफ्फरनगर डिपो और 27.5 लाख का नुकसान खतौली डिपो को हुआ है।
कांवड़ यात्रा के मद्देनजर 18 जुलाई को जनपद के यात्री वाहनों के लिए रूट डायवर्ट व एनएच 58 को बंद कर दिया गया था। दिल्ली देहरादून हाईवे पर केवल कांवड़ यात्रा का संचालन हुआ था। इस दौरान जिले के विभिन्न मार्गों पर चलने वाली बसों का संचालन आधा रह गया था। लंबे रूट की बसें भी जिले के दिल्ली देहरादून हाईवे के बजाए मेरठ जनपद के मवाना, मीरापुर, बिजनौर से होकर हरिद्वार जा रही थी। कुल 180 बसों में से आधी बसों के चलने के कारण रोडवेज विभाग की आय भी आधी रह गई थी। 26 जुलाई से प्रतिबंध हटा तो रोडवेज की बसें अपने पुराने मार्गों पर दौड़ी।
खतौली डिपो को 27.5 लाख लाख का नुकसान
खतौली रोडवेज डिपो से 86 बसें प्रतिदिन संचालित की जाती है। यह बसें दिल्ली, हरिद्वार, बुढ़ाना आदि मार्गों पर प्रतिदिन दौड़कर लगभग 11 लाख रुपये प्रतिदिन कमाती है। कांवड़ यात्रा के दौरान मार्ग बंद व डायवर्ट करने से इस मार्ग पर केवल कांवड़ियों को चलने की इजाजत थी। ऐसे में खतौली डिपो की बसों को जानसठ रोड से हरिद्वार, दिल्ली से हरिद्वार, दिल्ली से लखनऊ के लिए संचालित किया गया। 22 से 26 जुलाई तक रूट पूरी तरह से बंद रहा। इस कारण रोडवेज बसों ने प्रतिदिन साढे़ पांच लाख रुपये की आमदनी की। जबकि सामान्य दिनों में यह आमदनी ग्यारह लाख रुपये प्रतिदिन थी। इस हिसाब से खतौली डिपो को प्रतिदिन साढे़ पांच लाख रुपये तक का घाटा झेलना पड़ा।
जिले से 180 बसें रोजाना संचालित होती हैं। मगर, कांवड़ यात्रा के दौरान रूट डायवर्ट होने से आधी बसें ही चल सकीं। आम दिनों में लगभग बीस लाख की प्रतिदिन रोडवेज विभाग आमदनी करता था। मगर, कांवड़ यात्रा के दौरान यह आमदनी दस लाख रह गई। इस कारण निगम को 80 लाख का नुकसान हुआ है। - राज कुमार तोमर, वरिष्ठ केंद्र प्रभारी, मुजफ्फरनगर।
रोडवेज को रूट बंद व डायवर्ट होने से लगभग साढे़ पांच लाख रुपये प्रतिदिन का नुकसान हुआ है। - परवेज बसीर, एआरएम, खतौली