मुजफ्फरनगर। भागवत पीठ शुकदेव आश्रम शुक्रताल के पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद सरस्वती ने कहा कि यज्ञ भारत की सनातन संस्कृति का मूल आधार है। विश्व को प्रदूषण के संकट से बचाने के लिए यज्ञों और पौधरोपण की आवश्यकता है। गांधी पालीटेक्निक में 108 कुंडीय श्रद्धा-संवर्द्घन गायत्री महायज्ञ का शुभारंभ करते हुए स्वामी ओमानंद सरस्वती ने कहा कि आदिकाल से यज्ञ संस्कृति का प्राण और हृदय है।
वेदों में यज्ञ की महिमा विद्यमान है। पृथ्वी, जल और वायु की शुद्धता के लिए यज्ञों की महत्ता रही है। बढ़ती जनसंख्या और ब्रह्मांड में फैलते प्रदूषण की वजह से मानव जीवन संकट में घिरा है। यज्ञ की वैज्ञानिकता प्रमाणित है। प्रदूषण से मुक्ति के लिए यज्ञों और वृहत पौधरोपण का अभियान प्रारंभ होना चाहिए।
वैदिक मंत्रों से यज्ञ करने की प्रक्रिया संस्कारों की जननी है। परिवार और समाज में यज्ञ के माध्यम से व्यक्तित्व का निर्माण संभव है। उन्होंने कहा कि जन जीवन में नशे का परित्याग करने से घर में सुख-समृद्धि और उन्नति आएगी। युवा पीढ़ी जीवन निर्माण के साहित्य पढ़ें। शांति कुंज के संस्थापक आचार्य पंडित श्रीराम शर्मा ने गायत्री यज्ञ और गायत्री मंत्र को घर-घर तक पहुंचाने का पुनीत कार्य किया।
शांति कुंज के अनुयायियों ने स्वामी से आशीर्वाद लिया। डॉ चिन्मय पांडया ने कहा कि गायत्री महायज्ञ सूक्ष्म जगत में परिवर्तन करने तथा सभी के जीवन की समस्याओं को दूर करने का आध्यात्मिक कर्म है। मौके पर रुकमणि भारद्वाज, जितेंद्र मिश्रा, कालीचरण शर्मा, गणेश पंवार, अमरनाथ, तत्वदर्शी आदि रहे।