खतौली वह पुस्तक जिसमें ़14 अगस्त खतौली के लिए खास है।
- खतौली के लिए भारत छोड़ो आंदोलन के अंतर्गत 14 अगस्त की तारीख है खास
संवाद न्यूज एजेंसी
खतौली (मुजफ्फरनगर)। भारत छोड़ो आंदोलन में 14 अगस्त की तारीख खतौली के लिए अत्यंत खास मानी जाती है। इस दिन मेरठ स्थित गुरुकुल डोरली के अध्यापक एवं छात्रों ने खतौली में गंगनहर पर बने लोहे के रेलवे पुल को विध्वंस करने की योजना बनाई थी। योजना को अंजाम देने आए पांच लोगों को ब्रिटिश सरकार ने गिरफ्तार कर लिया था।
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में मुजफ्फरनगर का योगदान पुस्तक में इस प्रकरण का उल्लेख है। अध्यापक और छात्र खतौली स्थित रेलवे पुल को विध्वंस करने के इरादे से अपना सामान थैले में भरकर 14 अगस्त की रात 12 बजे रेलवे पुल के पास पहुंच गए। पुल पर पहरे के लिए सेना की टुकड़ी सुरक्षा के लिए लगाई गई थी। इन सब के पुल पर पहुंचते ही पुलिसकर्मियों ने घेर लिया। खुद को घिरा देखकर छात्रों ने सामान का थैला नहर में फेंक कर हाथ उठाकर गिरफ्तारी दे दी।
प्रकरण में रणवीर सिंह और कृष्णानंद को दो-दो साल की सजा दी गई जबकि अन्य तीनों को पांच साल की सजा हुई। योजना को साकार करने के लिए हरिदत्त शास्त्री ग्राम ततिना, कृष्णानंद शास्त्री सिरसली, रणबीर सिंह बुलंदशहर, महावीर प्रसाद हापुड़, जगन्नाथ प्रसाद अवस्थी और राजेश्वर शास्त्री खतौली आए थे।
खतौली वह पुस्तक जिसमें ़14 अगस्त खतौली के लिए खास है।