मुजफ्फरनगर। अधिक खांसी व तेज बुखार वाले कुछ मरीज टीबी की चपेट में भी आ रहे है। जांच कराने पर मरीजों में टीबी पॉजीटिव पाई जा रही है। हर माह जिले में करीब 600 नए टीबी रोगी मिल रहे हैं। जिला क्षय रोग विभाग में फिलहाल चार हजार से अधिक टीबी रोगियों का उपचार चल रहा है।
जिला क्षय रोग विभाग की ओर से टीबी रोगियों की खोज के लिए अधिक से अधिक जांच कराई जाती है। लंबे समय से खांसी से पीड़ित व बुखार वाले मरीजों की भी जांच कराई जाती है। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. लोकेश चंद्र गुप्ता ने बताया कि हर माह करीब 500-600 नए मरीज मिल जाते हैं।
उन्होंने बताया कि अब फिलहाल 4789 मरीजों का उपचार जारी है। सभी पॉजीटिव मरीजों की एचआईवी जांच भी कराई जाती है। टीबी रोगियों की एचआईवी और शुगर जांच कराना जरूरी होता है। सामान्य मरीजों का छह माह और गंभीर मरीजों का नौ माह तक इलाज चलता है।
टीबी रोगियों को अन्य लोगों से दूरी बनाकर रखनी चाहिए। खांसी की हवा दूसरे तक नहीं पहुंचनी चाहिए। टीबी रोगी चिकनाई से परहेज करें। धूल-मिट्टी से बचकर रहें। खाने में कम से कम मिर्च का इस्तेमाल करें। खांसी होने पर चिकित्सक से परामर्श लें। ज्यादा लंबे समय तक खांसी होने पर टीबी जांच जरूर कराएं।
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पिछले छह माह से चल रही दवाइयों की कमी
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. लोकेश चंद्र गुप्ता ने बताया कि पिछले छह माह से दवाइयों का पर्याप्त स्टॉक नहीं पहुंच पा रहा है। हालांकि इस कारण से किसी भी मरीज की दवा बंद नहीं की जा रही है। जिन मरीजों को पहले एक माह की एक साथ दवा दी जाती थी, अब उन्हें 10-10 दिन की दी जा रही है। इससे सभी मरीजों तक नियमित रूप से दवा पहुंच रही है।
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कई तरह की होती है टीबी
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. लोकेश चंद्र गुप्ता ने बताया कि बाल और नाखून को छोड़कर टीबी हर जगह हो सकती है। उन्होंने कहा कि वैसे तो सबसे खतरनाक फेफड़ों की टीबी होती है। इसके अलावा गांठ, पेट, हड्डी, आंख और खाल वाली टीबी भी होती है, जिनका इलाज लंबे समय तक चलता है।