बज्मे जिगर उर्दू सोसाइटी के तत्वावधान में ‘एक शाम अल्ताफ जिया के नाम’ ऑल इंडिया मुशायरा आयोजित
संवाद न्यूज एजेंसी
खतौली। बज्मे जिगर उर्दू सोसाइटी के तत्वावधान में ‘एक शाम अल्ताफ जिया के नाम’ ऑल इंडिया मुशायरा का आयोजन किया गया। शायरों ने मौजूदा हालात पर तंज कसे। फेमस खतौलवी के शेर ‘जायका अपना बदल सकता नहीं, चाहे जितना गुड़ मिला लो जहर में, अमन हो सकता नहीं है दोस्तों, एक भी नेता है जब तक शहर में।
मोहल्ला सराफान में आयोजित मुशायरे का उद्घाटन नगर पंचायत फलावदा के चेयरमैन अब्दुल समद और सैय्यद रिहानउद्दीन ने संयुक्त रूप से फीता काटकर किया। शमा रोशन हाजी जावेद ने की। मुशायरे का शुभारंभ शायर अल्ताफ जिया ने नाते पाक ‘कोई दीवार हो दीवार नहीं बन सकती, जब हवाओं का गुजर जाने को जी चाहता है’ से किया। राहत मंगलौरी का कलाम ‘मोहब्बत को समझते हो तमाशा, जरा एक बार करके तुम दिखाना’ सुनाया। परवेज गाजी ने ‘मुंसिफ से इंसाफ यहां नामुमकिन है, भैंस के आगे बीन बजाने बैठ गए’ सुनाया तो श्रोताओं की तालियों से पंडाल गूंज उठा। मुशायरे की सदारत कर रहे मशहूर शायर अफजल मंगलौरी ने ‘मरहम नदामतों का तो अब लग चुका बहुत, ऐ जख्में बेहिसी तुझे भर जाना चाहिए’, वसीम राजोपुरी ने ‘ख्याल आता है कमजोरी में चलते देखकर अक्सर, मैं अपने बाप की टांगों से टांगे बांध लूं अपनी’ और मालेगाव से आए शायर सुहेल आजाद ने ‘एक चमकदार अभी रखी है, टीपू सुल्तान की तलवार अभी रखी है’ सुनाकर वाहवाही लूटी।
मुशायरे का संचालन परवेज गाजी ने किया। निजामत मालेगाव से आए शायर इरशाद अंजुम ने की। अध्यक्षता शायर अफजल मंगलौरी ने की। संयोजक चांद सिद्दीकी ने सभी का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में हाजी नौशाद अहमद मोनी, शिबली, आस मोहम्मद, मुफ्ती मुजीब उर रहमान, सोनू फरीदी, अफाक सैफी, बिट्टू, आसिफ, हाफिज अजीजुर रहमान, मौलाना मोहम्मद अली जौहर, शादाब सहित अन्य लोग मौजूद रहे।