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शुरू हुआ मदरसों का सर्वे शुरू

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नगर के सूजडू स्थित मदरसे में जांच एसडीएम परमानंद झा। - फोटो : MUZAFFARNAGAR
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- 2016 के बाद से जिले में नहीं दी गई मदरसों को मान्यता
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- 300 मदरसे गैर मान्यता के संचालित किए जाने का अनुमान
- एसडीएम परमानंद झा ने सुजडू गांव पहुंचकर मान्यता की जांच की
संवाद न्यूज एजेंसी
मुजफ्फरनगर। जनपद में गैर मान्यता प्राप्त मदरसों के सर्वे का कार्य शुरू हो गया है। एसडीएम परमानंद झा ने सुजडू गांव पहुंचकर मान्यता की जांच की। प्रशासन ने उपजिलाधिकारियों की निगरानी में टीम गठित की है। जिले में करीब तीन सौ मदरसे गैर मान्यता के संचालित किए जाने का अनुमान है। 2016 के बाद जिले में नए मदरसों को मान्यता नहीं दी गई।
प्रदेश सरकार ने बिना मान्यता के चल रहे मदरसों के चिन्हांकन के आदेश जिला प्रशासन को दिए हैं। जिले में इन मदरसों को चिह्नित करने के लिए प्रत्येक तहसील में एसडीएम की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई है। तहसील स्तर पर मदरसों की संख्या एकत्र की जाएगी। जिले की सभी कमेटियों में जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी और बीएसए को रखा गया है। एसडीएम सदर परमानंद झा ने बताया कि तहसील के लेखपालों आदि की मदद से कमेटी इन मदरसों के चिह्नित करने का काम कर रही है। सुजडू समेत अन्य गांव में सर्वे शुरू कर दिया गया है।
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आधुनिक शिक्षा दे रहे 34 मदरसे
अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की ओर से जिले में केवल 134 मदरसों की मान्यता है। जनपद में केवल 34 मदरसे ही ऐसे हैं, जो आधुनिक शिक्षा दे रहे हैं। इन मदरसों के 94 शिक्षकों का वेतन सरकार देती है। ग्रेजुएट शिक्षक को प्रति माह आठ हजार और पोस्ट ग्रेजुएट को 15 हजार मिलते हैं। एक मदरसे में तीन शिक्षक रखे गए हैं।
नहीं दी जा रही मान्यता
एक मदरसा संचालक ने बताया कि मान्यता के लिए वह कई बार जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी के कार्यालय में जा चुके हैं। नए मदरसों को मान्यता ही नहीं दी जा रही है। 2016 के बाद से अब तक जिले में एक भी मदरसे को मान्यता नहीं दी गई है।
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सभी तहसीलों में एसडीएम की अध्यक्षता में टीम गठित हुई है। जिला स्तर पर इसकी मॉनिटरिंग एडीएम प्रशासन नरेंद्र बहादुर सिंह कर रहे हैं। बिना मान्यता के चल रहे मदरसों को चिह्नित करने का काम तेजी से चल रहा है। - मैत्री रस्तौगी, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी
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