सीआरपीएफ के जवान मनोज कुमार की शहादत से गांव के लोग काफी आक्रोशित है। गांव के लोग नक्सली समस्या से आरपार की लड़ाई चाहते हैं। कहते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नक्सलियों के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक करना चाहिए। किसी और की जान जाने का इंतजार नहीं करना चाहिए।
सुकमा हमले में शहीद के मनोज के भाई रमेश का कहना है कि उन्हें भाई की शहादत पर गर्व है, लेकिन सरकार को नक्सलियों के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक करनी चाहिए। मनोज की शहादत बेकार नहीं जानी चाहिए। सरकार अब किसी और के भाई-बेटे की जान जाने का इंतजार न करे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुद इस मामले में पहल करनी चाहिए। गांव के ही मुख्तयार सिंह कहते हैं कि बहुत हो चुका। अब नौजवानों का खून बहते हुए नहीं देखना चाहिए।
नक्सलियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। ग्राम प्रधान के पति विजयपाल सिंह का कहना है कि सरकार को गांव में शहीद के नाम से ऐसा कोई काम कराना चाहिए, जिससे उसे हमेशा याद रखा जाए। नरेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार को पीड़ित परिवार की हरसंभव मदद करनी चाहिए। डॉक्टर संजय का कहना है कि सरकार अब और शहादत का इंतजार न करे, नक्सलियों पर सीधा अटैक करे। मनोज की शहादत ने गांव का नाम पूरे देश में रोशन किया है।
तीनों बेटियों की पढ़ाई का खर्चा दे सरकार
भोपा (मुजफ्फरनगर)। शहीद की मां राजेश देवी ने डीएम के नाम ज्ञापन देकर सरकार से तीनों बेटियों की पढ़ाई और शादी का खर्चा तथा दो बेटों जोगेंद्र और रमेश के लिए रोजगार की मांग की है। इसके अलावा गांव में शहीद के नाम से इंटर कालेज खोलने की भी मांग रखी। उधर, महिला के घर राजनातिज्ञों के अलावा अफसरों का जमावड़ा लगा रहा।
राजनीतिज्ञों ने उसके परिवार के सदस्यों को ढांढस बंधाया। इस दौरान पूर्व विधायक अशोक कंसल, डॉक्टर वीरपाल निर्वाल, रालोद नेता अजीत राठी, अमित राठी, प्रधान विजयपाल, पुलिस प्रशासन की और से एसपी देहात विनीत भटनागर, एसडीएम जानसठ उमेश कुमार मिश्रा, सीओ अकील अहमद, थाना प्रभारी निरीक्षक विजय सिंह आदि मौजूद रहे।
अच्छा धावक था मनोज
भोपा। शहीद मनोज कालेज और अपनी बटालियन में होने वाले खेलों में अच्छे धावकों मेें रहा। स्कूल से लेकर सीआरपीएफ में जाने तक उसने 100, 400 और 800 मीटर की दौड़ में हमेशा पदक जीता। परिजनों ने शहीद द्वारा जीते गए पदकों को दिखाया।
हमेशा के लिए चला गया परिवार से दूर
भोपा। निरगाजनी के शहीद मनोज कुमार के अलावा दो और युवक राजेंद्र एवं रविराम भी सीआरपीएफ में उसी के साथ भर्ती हुए थे। गांव के ही राजेंद्र की आठ मई को शादी तय है। तीन दिन पूर्व मनोज ने घर फोन कर भाई रमेश को बताया था कि वह राजेंद्र की शादी में घर आएगा। पूरा परिवार उसके इंतजार में जुटा था। सोमवार को अचानक नक्सली हमला हुआ और मनोज हमेशा के लिए परिवार से दूर चला गया। पूरे परिवार पर गम का पहाड़ टूट पड़ा है।