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सुल्तान के पर्दे पर चमका मोरना 

Thu, 07 Jul 2016 01:03 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
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मुजफ्फरनगर में सुल्तान फिल्म देखने उमड़ी भीड़। - फोटो : अमर उजाला
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आखिरकार सलमान खान की फिल्म सुल्तान का इंतजार खत्म हुआ। फिल्म में पहलवान का ठेठ अंदाज दर्शकों को खूब भाया। सुल्तान के पीछे एक रेसलर की कहानी है। फिल्म में खेत-खलियान और बोलचाल में हरियाणवी पुट की भरमार है। मोरना ब्लाक और शुक्रताल इलाके के लगभग पांच मिनट के सीन फिल्म में दिखाए गए हैं। 
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यशराज बैनर की फिल्म सुल्तान की अप्रैल माह में मोरना और शुक्रताल में शूटिंग हुई थी। अभिनेता सलमान खान खुद तीन दिन जिले में रहे। सुल्तान की कहानी एक पहलवान की जिंदगी पर फोकस है। फिल्म की शूटिंग मोरना ब्लाक परिसर में हुई थी। मस्तमौला गबरु पहलवान यानि सुल्तान (सलमान खान) को आरफा (अनुष्का शर्मा) नाम की रेसलर से प्यार हो जाता है।

वह अनुष्का को हासिल करने के लिए पहलवान बन जाता है। बाद में दोनों का निकाह होता है। इस बीच नवजात बच्चे की मौत को लेकर दोनों में अलगाव हो जाता है। हालांकि अंत में दोनों का मिलाप भी है। खेल कोटे से सुल्तान को जल निगम में सरकारी नौकरी मिलती है। वह अपनी ड्यूटी पर आसमानी कलर के स्कूटर पर सवार होकर पहुंचता है।
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खून के अभाव में हुई अपने बच्चे की मौत के बाद से ही सुल्तान ब्लड बैंक बनवाने के लिए चंदा इकट्ठा करने में जुट जाता है। इसी बीच दिल्ली का एक बिजनेसमैन आकाश ओबेराय (अमित साध) रेवाड़ी आता है। वह सुल्तान को तलाशते हुए जल निगम बरौली के दफ्तर पहुंचता है, जहां सुल्तान से दफ्तर के अंदर और बाहर पेड़ के नीचे बैठकर कुछ देर संवाद होता है।

बिजनेसमैन सुल्तान को पेशेवर रेसलिंग का ऑफर देता है, जिसे वह ठुकरा देता है। इसी बीच दफ्तर के बाहर कुछ किसानों का ट्रैक्टर गड्ढ़े में फंस जाता है। किसान सुल्तान को दफ्तर से बुलाकर लाते हैं। सुल्तान अपना स्वेटर उतारता है और जोर लगाकर ट्रैक्टर को गड्ढे से बाहर निकाल देता है। इसके बाद सलमान कुछ बच्चों को स्कूटर पर बैठाकर बिहारगढ़ के रास्ते पर जाते हुए दिखते हैं।

बच्चे गन्ने का जूस पीते हैं। गाने के दौरान ही यह सीन दिखाई देते हैं। शुक्रताल के गंगा घाट पर ड्रोन कैमरे से लिए गए सीन के साथ ही सुल्तान स्कूटर से गंगा पुल पर आते हुए दिखते हैं। सुल्तान को देखकर साधु-संत भी जय हो सुल्तान का उद्घोष करते हैं और सुल्तान हाथ उठाकर अभिवादन करते दिखते हैं। मुजफ्फरनगर में शूट किए गए अधिकांश हिस्से फिल्म के शुरुआती आधे घंटे में ही नजर आ जाते हैं।

फिल्म को लेकर जिले के लोगों में खासा उत्साह है, लेकिन यह मलाल भी है कि फिल्म में जो दृश्य फिल्माए गए हैं, वह सब बरौली रेवाड़ी, हरियाणा के नाम से हैं। पूरी फिल्म में मुजफ्फरनगर के नाम का जिक्र तक नहीं है। कुल मिलाकर फिल्म की कहानी पहलवानों पर केंद्रित है। किसी तड़क-भड़क का सहारा नहीं लिया गया है। 

विशेष आभार में एसपी जौली
मोरना और शुक्रताल में फिल्म की शूटिंग का जिम्मा एसपी राकेश कुमार जौली पर था। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए एसपी को खासी मशक्कत करनी पड़ी थी। यशराज प्रोडक्शन हाउस ने फिल्म के अंत में विशेष आभार सूची में एसपी मुजफ्फरनगर राकेश कुमार जौली का नाम भी सम्मलित किया है। 
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