मुजफ्फरनगर। कोरोना काल में किसानों को इस बार बड़ा झटका लगा है। जिले में गन्ने का उत्पादन गत वर्ष के मुकाबले दस प्रतिशत घट गया है। चीनी का परता भी 0.18 प्रतिशत कम रहा है। 15 हजार हेक्टेयर रकबा बढ़ने के बाद भी इस सत्र में गन्ने का उत्पादन 52 लाख क्विंटल कम हुआ है।
पेराई सत्र 2019-20 में जून तक चीनी मिलों के चलने का असर जिले में इस बार गन्ना उत्पादन पर सीधे पड़ा है। चार माह बाद अक्तूबर में चीनी मिले चलीं तो पेड़ी में गन्ने का उत्पादन 20 प्रतिशत तक घट गया। यही नहीं चीनी मिलों की रिकवरी भी 0.18 प्रतिशत कम हो गई। दिसंबर के अंत और जनवरी के शुरू में हुई पौधे की कटाई ने गन्ने के उत्पादन और रिकवरी को संभाला, जिसके चलते कुल उत्पादन दस प्रतिशत कम हो गया।
गत वर्ष अच्छा उत्पादन होने के चलते किसानों का रुझान गन्ने की तरफ बढ़ा था और वर्ष 2020-21 में गन्ने के क्षेत्रफल में 15 हजार हेक्टेयर की बढ़ोतरी हो गई। जिले में गन्ने के क्षेत्रफल में बढ़ोत्तरी के बाद भी गत वर्ष के मुकाबले गन्ने का उत्पादन 52 लाख क्विंटल कम हुआ। किसानों को इस सत्र में 169 करोड़ कम मिलेगा, जो किसानों का सीधा नुकसान है। क्षेत्रफल बढ़ने से उत्पादन और किसानों की आय में वृद्धि होनी चाहिए थी, परिणाम उलट रहा है। चीनी का उत्पादन भी गत वर्ष के मुकाबले आठ लाख क्विंटल कम हुआ है।
किसानों को होने वाला भुगतान
2020-21 में 3234 करोड़
2019-20 में 3403 करोड़
गन्ने का क्षेत्रफल
2020-21 में एक लाख 64 हजार 403 हेक्टेयर
2019-20 में एक लाख 49 हजार 300 हेक्टेयर
मिलों में गन्ने की पेराई
2020-21 में 1005.20 लाख क्विंटल
2019-20 में 1057.24 लाख क्विंटल
चीनी परता
2020-21 में 11.41 प्रतिशत
2019-20 में 11.59 प्रतिशत
चीनी उत्पादन
2020-21 में 114.55 लाख क्विंटल
2019-20 में 122.54 लाख क्विंटल
उत्पादन और रिकवरी प्रभावित हुई : द्विवेदी
जिला गन्ना अधिकारी डॉ. आरडी द्विवेदी का कहना है कि सत्र 2019-20 में देर तक पेराई होने के कारण 2020-21 में शुरूआत में गन्ना सही प्रकार से तैयार नहीं हो पाया। गन्ने की पेड़ी में उत्पादन और रिकवरी दोनो कम रहे। हालांकि पौधे में ज्यादा अंतर नहीं रहा। क्षेत्रफल बढ़ने के बाद भी जिले में 52 लाख क्विंटल गन्ने का उत्पादन घटा है।