तितावी। जवाहर नवोदय विद्यालय बघरा में राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें छात्रों का परीक्षा के समय होने वाले तनाव से मुक्त रहने के टिप्स दिए गए।
नोडल अधिकारी डॉ प्रशांत कुमार ने बताया सभी माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा टॉप करे, उनका नाम रोशन करे। एक अभिभावक यह चाहेगा ही, इसमें गलत कुछ नहीं है। गलत तब है, जब अंकों की यह भूख बच्चे की क्षमता से आगे निकल जाए। अगर पता है कि बच्चा ज्यादा अंक नहीं ला पाएगा, फिर भी दबाव बनाते हैं तो यह बहुत ही खतरनाक है। बच्चा क्या बनना चाहता है, उसे क्या पसंद है, वह क्या करना चाहता है, माता-पिता सिर्फ इसी पर अपना फोकस करें।
जिला अस्पताल के मनोचिकित्सक डॉ मनोज कुमार ने कहा कि परीक्षाओं का मौसम आ चुका है। इस समय विद्यार्थियों में तनाव का होना लाजिमी है। मगर, जब यह मान लिया जाता है कि अच्छे अंक न हो तो कुछ नहीं, तब यह तनाव खतरनाक मोड़ पर पहुंच जाता है। उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति कभी भी मानसिक रोग से ग्रसित हो सकता है। यदि नींद कम आना, सिर भारी रहना, उत्साह में कमी, डर लगना, बहुत जिद्दी होना, ज्यादा गुस्सा करना, अवसाद, नशा के कारण, याददाश्त में कमी, उलझन एवं घबराहट और बेचैनी आदि लक्षण दिखाई दें तो यह मानसिक रोग हो सकता है। विद्यालय की प्रिंसिपल सुमनलता यादव ने बच्चों को तनाव मुक्त रहने के बारे में बताया।