अमर उजाला ब्यूरो
मुजफ्फरनगर। निराश्रित पशु किसानों के लिए मुसीबत बन गए हैं। जिले की गोशालाओं में पशु कम और सड़कों और खेतों में अधिक घूम रहे हैं। गेहूं और सरसों की फसल में नुकसान के कारण किसान परेशान है। किसानों के बीच नाराजगी फैल रही है। वर्तमान में जिले की 37 गोशालाओं में करीब 2600 पशु हैं। दिनभर और रात के समय किसान पशुओं को खेतों से दौड़ाने में जुटे रहते हैं। खेतों की तारबंदी से आर्थिक बोझ भी किसानों पर बढ़ने लगा है।
बड्सू के किसानों ने टंकी परिसर में बंद किए पशु
रतनपुरी। रतनपुरी क्षेत्र के किसानों के लिए सिर दर्द बने निराश्रित पशुओं का कोई स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा है। ये पशु किसानों की सरसों व गेहूं की फसल को बहुत नुकसान पहुंचा रहे हैं। किसानों को फसलों की रखवाली करनी पड़ रही है, लेकिन प्रशासन के पास इन पशुओं से निजात दिलाने के किए कोई कारगर समाधान नहीं है। इसी से आजिज गांव बड़सू के किसानों ने पशुओं को पकड़ कर पानी की टंकी के अहाते में बंद किया। दो दिनों से टंकी में बंद पशुओं की सुध लेने वाला कोई नहीं आया। ग्राम प्रधान जयपाल सिंह और ग्राम पंचायत सचिव अवधेश पुंडीर को किसानों ने जानकारी दी। बीडीओ खतौली शमां सिंह भी मौके पर पहुंचीं। उन्होंने ग्राम प्रधान एवं ग्राम पंचायत सचिव को पशुओं को आसपास के गौ आश्रय स्थलों में भेजने के निर्देश दिए हैं। चार पशुओं को समौली स्थित गौ आश्रय स्थल में भेज दिया गया, जबकि बाकी दर्जनों गौवंश अभी भी टंकी प्रांगण में ही बंद हैं।
किसानों के लिए जानलेवा हो रहे साबित
निराश्रित पशु किसानों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं। तितावी में खेत में गए किसान को निराश्रित पशु ने पटककर मार दिया था। प्रशासन ने आश्वासन दिया था कि पशुओं को गोशाला में भिजवाया जाएगा, लेकिन अभी तक समाधान नहीं हुआ।
गाय अभयारण्य जगा रहा है उम्मीद
पुरकाजी क्षेत्र के चंदन गांव में सरकार ने गाय अभयारण्य बनाने की तैयारी की है। करीब पांच हजार पशुओं की क्षमता वाले अभयारण्य से जिले के किसानों को राहत की उम्मीद है। मगर, इसका निर्माण कब तक पूरा होगा, इसके लिए इंतजार करना होगा।