गहने बेचे, कर्ज लेकर चुकाया 13 लाख का बिल, जान फिर भी न बची
मुजफ्फरनगर। कोविड हॉस्पिटल ईवान में भर्ती मरीज संक्रमित महिला जरीना की जान बचाने के लिए परिजनों ने क्या नहीं किया, गहने बेचे, परिजनों ने परिचितों, रिश्तेदारों से पैसा लिया, सोशल मीडिया पर इलाज के लिए मदद मांगी, कर्ज लेकर भी इलाज कराया और 45 दिन का बिल 12.94 लाख रुपये चुकाया, इतना सब करने के बाद भी महिला की जान नहीं बची। सरकार संक्रमित मरीजों के उपचार के लिए रेट निर्धारित किए, लेकिन इसके बाद भी मनमाना बिल बनाया गया। पीड़ित परिवार की शिकायत के बाद जिला स्तर पर गठित कमेटी ने प्रकरण की जांच शुरू कर दी है।
शहर के हनुमान चौक के निकट बाग जानकीदास निवासी जरीना (51) कोरोना महामारी की चपेट में आ गई थी। जरीना के पति अब्दुल हादी दिल्ली में 12 हजार रुपये महीना की एक प्राइवेट नौकरी करते हैं। एक पड़ोसी से पांच हजार उधार लेकर वह पांच मई को जरीना को ईवान हॉस्पिटल लेकर पहुंचे थे। हॉस्पिटल ने दो लाख एडवांस जमा करने की शर्त पर भर्ती करने की बात कही। जरीना के गहने बेचने के बाद दो लाख की रकम एकत्र हुई और उसे हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया।
हॉस्पिटल ने 1.25 लाख का बाईपेप (बाइलेवल पॉजिटिव एयरवे प्रेशर) मशीन उनसे मंगवाई। 1.50 लाख के इंजेक्शन और दवा बाहर से मंगवाई। इस बीच सभी रिश्तेदार मदद को आए। अब्दुल हादी ने बताया कि उसकी बहन ने भी अपने सारे जेवर बेच दिए। सभी रिश्तेदारों और परिचितों से मदद मांगी। अंत में आकर जब खर्च बढ़ता गया तो सोशल मीडिया के जरीए मदद मांगी गई। 45 दिन उपचार के बाद 21 जून को जरीना का निधन हो गया। ईवान हॉस्पिटल ने उपचार का बिल 12.94 लाख का बनाया है। जरीना की मौत हो गई और पूरा परिवार आर्थिक बदहाली पर आ गया है। अब्दुल हादी के चार बेटी और एक बेटा है। पीड़ित परिवार ने न्याय के लिए जिला स्तरीय जांच समिति के समक्ष गुहार लगाई है और एडीएम प्रशासन अमित सिंह को हॉस्पिटल की उगाही के खिलाफ प्रार्थना पत्र दिया है। संवाद
सरकार के निर्धारिट रेट से अधिक चार्ज वसूले
प्रदेश सरकार ने आईसीयू का 10 हजार 800 रुपये प्रतिदिन और वेंटिलेटर का 12 हजार तय किया है। इसके बावजूद ईवान हॉस्पिटल ने एक दिन के 30 हजार तक वसूले।
अम्मी के साथ भर्ती सभी मरीजों की मौत हुई: फरहत
हॉस्पिटल में जरीना के उपचार के दौरान उसके साथ रहने वाली उसकी बेटी फरहत हादी का कहना है कि उसकी अम्मी के साथ जितने लोग भी हॉस्पिटल में भर्ती थे सबकी मौत हुई है, कोई सही नहीं हो पाया। हॉस्पिटल के लोग किसी सीरियस मरीज का उपचार कर ही नहीं पाए। हमारे साथ उपचार करा रही बीके पूनम की 25 दिन बाद यहां मौत हुई। किरण फार्म के मालिक की पत्नी की भी एक माह के उपचार के बाद मौत हुई। अन्य भर्ती लोगों के साथ भी ऐसा ही हुआ।
पीड़ित परिवार को न्याय मिलेगा
जिला स्तरीय जांच समिति के सदस्य एडीएम प्रशासन अमित सिंह का कहना है कि सरकार द्वारा निर्धारित पैसे से जो अधिक लिया गया है, वह हॉस्पिटल को वापस देना होगा। पीड़ित परिवार को न्याय दिलाया जाएगा।
हॉस्पिटल के नियमों के तहत बने हैं बिल
ईवान हॉस्पिटल की बिलिंग मैनेजर ममता चावला का कहना है कि कोविड पेशेंट हमारे यहां 45 दिन से अधिक भर्ती रहीं हैं, जिनकी बाद में मौत हुई है। उनका मेडिकल बिल हॉस्पिटल के नियमों के तहत ही बनाया गया है। जब शासन के सीमित शुल्क संबंधी आदेश जारी हुए, तो उसके बाद भर्ती मरीजों के बिल शासनादेश के अनुसार बनाए गए हैं, जबकि इससे पहले भर्ती मरीजों के बिल हॉस्पिटल नियमों के तहत बनाए गए हैं। जरीना भी शासन के आदेश आने से पहले से हॉस्पिटल में भर्ती थीं, जिसके चलते उनके बिल नियमानुसार ही बनाए गए हैं।