छह हजार परिवार तिरपाल के नीचे रात काटने को विवश
जर्जर मकानों में रह रहे परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ तो मिला, लेकिन सुस्ती इस कदर है कि पांच महीने बाद भी करीब छह हजार लाभार्थियों को छत नसीब नहीं हुई। पहली किस्त मिलते ही पात्रों ने अपने पुराने मकान जमींदोज कर दिए। हालांकि दूसरी किस्त में देरी से नए मकान का लिंटर नहीं पड़ सका। सरकारी अव्यवस्था का आलम यह है कि अब हजारों परिवारों को तिरपाल या पॉलिथीन की छत डालकर कड़ाके की सर्दी वाली रातें बितानी पड़ रही हैं।
मुजफ्फरनगर। नगर के मोहल्ला रैदासपुरी की बेबी पत्नी जुगल किशोर को प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना की पहली किस्त के 50 हजार रुपये सितंबर 2019 में मिले थे। उन्होंने अपना जर्जर मकान तोड़ निर्माण शुरू करा दिया। चार महीने दूसरी किस्त के 1.50 लाख रुपये का इंतजार किया। आठ दिन पहले ही उनके खाते में पैसे आए, तब से इस परिवार पॉलिथीन डालकर रहने को मजबूर है। घर का सामान रखने के लिए पास में ही एक छोटा सा कमरा किराये पर ले रखा है।
यह स्थिति केवल बेबी के परिवार की ही नहीं, बल्कि हजारों लाभार्थियों की है। इसी मोहल्ले में नरेश कुमार का भी मकान बन रहा है। उन्हें नवंबर में पहली किस्त मिली। दूसरी किस्त नहीं मिलने से दीवारें नहीं बन पाईं। रैदासपुरी की ही मुकेश पत्नी अजय की स्थिति भी ऐसी ही है। एक सप्ताह पहले दूसरी किस्त मिली तो दीवारें बनवानी शुरू कराई। कड़ाके की इस सर्दी के मौसम में इन परिवारों का एक-एक दिन मुसीबत भरा गुजर रहा है। कुछ ने पड़ोसियों के घरों में शरण ले रखी है तो कुछ तिरपाल डालकर समय काट रहे हैं। इस मोहल्ले में 30 से ज्यादा लोगों को मकान का लाभ मिला है, लेकिन दो-चार के ही लिंटर डल पाए हैं।
11 हजार का चयन, 10 हजार को मिली पहली किस्त
डूडा के माध्यम से संचालित इस योजना में लगभग 11 हजार लाभार्थियों का चयन हुआ है। इनमें से करीब 10300 के खाते में पहली किस्त, आठ हजार लाभार्थियों को दूसरी किस्त और लगभग चार हजार को ही तीसरी किस्त की धनराशि मिली है। करीब दो हजार लोग ऐसे हैं, जिन्हें दूसरी किस्त गई ही नहीं और करीब चार हजार ऐसे हैं, जिन्हें कुछ दिन पहले ही दूसरी किस्त के पैसे मिले। इन सबके मकानों पर लिंटर नहीं डल पाया।
इस तरह दी जाती है किस्तें
प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना के तहत ढाई लाख रुपये तीन किस्तों में दिए जाते हैं। 50 हजार की पहली किस्त नींव भरवाने के लिए मिलती है। यह काम पूरा होने पर डेढ़ लाख रुपये मिलते हैं। इस राशि से दीवारें और लिंटर का काम कराना होता है। इसके बाद 50 हजार रुपये प्लास्टर व फिनिशिंग के कार्य के लिए तीसरी किस्त में दिए जाते हैं।
इन्होंने कहा...
पीएम आवास का पैसा चरणवार मिलता है। हमारे स्तर से कोई देरी नहीं की जाती। लाभार्थी जैसे ही काम पूरा करते हैं तुरंत अगली किस्त के लिए डिमांड भेज दी जाती है। दो किस्तों के बीच एक से सवा महीने का समय लग जाता है।
- संदीप कुमार, परियोजना अधिकारी, डूडा।
रैदासपुरी में प्रधानमंत्री योजना के निर्माणाधीन मकान।- फोटो : MUZAFFARNAGAR
रैदासपुरी में प्रधानमंत्री योजना के निर्माणाधीन मकान।- फोटो : MUZAFFARNAGAR