मुजफ्फरनगर। शामली के बहावड़ी गांव में मुजफ्फरनगर दंगे के दौरान दर्ज कराए गए डकैती और तोड़फोड़ के मुकदमे में साक्ष्यों के अभाव में तीन सगे भाइयों समेत छह आरोपियों को दोषमुक्त करार दिया गया। अपर सत्र न्यायालय कोर्ट संख्या-7 की पीठासीन अधिकारी दिव्या भार्गव ने फैसला सुनाया।
बहावड़ी के कामिल ने फुगाना थाने में मुकदमा दर्ज कराते हुए बताया था कि नौ सितंबर 2013 को गांव के ही छह आरोपी उसके घर में घुस आए। सामान लूट लिया और दरवाजा तोड़ दिया। वारदात के बाद पीड़ित पलायन कर कैराना चला गया था। आरोपी मेघराव, सोविंद्र, राजेंद्र पुत्र खिलारी, मिंटू व मीरू पुत्र पाला और हजारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था।
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ जांच के बाद आरोपपत्र दाखिल किया। करीब 11 साल तक मामले की सुनवाई चली। अभियोजन पक्ष अदालत में मामले को साबित नहीं कर सका। गवाह भी मुकर गए। शनिवार को अपर सत्र न्यायालय कोर्ट संख्या-7 में मामले की सुनवाई हुई। अदालत साक्ष्यों के अभाव में सभी छह आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया।
गांव वालों ने लिखवा दिए थे नाम
मामले में महत्वपूर्ण मोड़ 26 अप्रैल 2022 को आया। मुकदमे के वादी कामिल ने अदालत में बयान दिया कि घटना के दिन वह पड़ोसी के घर जाकर बैठ गए थे। पड़ोस के लोगों ने उन्हें जानकारी दी थी। चौथे दिन नाम लिखवाए गए थे। प्रकरण के बाद अफरा-तफरी थी , गांव वालों ने नाम लिखवा दिए थे।