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सेवा कभी निष्फल नहीं होती : ओमानंद महाराज

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संवाद न्यूज एजेंसी
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मोरना। शुकदेव आश्रम के पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद महाराज ने कहा कि तन, मन, धन व्यर्थ के कामों में नष्ट कर देते हैं, जबकि लोक कल्याणकारी व देश उत्थान में कर्म किया जाए, वह कभी निष्फल नहीं जाता।
विद्याभूषण संत विद्यासागर महाराज की 73वीं जयंती पर बिहारगढ़ स्थित अपना घर आश्रम में 251 बिस्तरों का शुभारंभ स्वामी ओमानंद महाराज ने दीप प्रज्ज्वलित करके किया। उन्होंने कहा कि धन की तीन गति - भोग, दान, विनाश। मनुष्य धन अर्जन ना करें, बल्कि विसर्जन करें। जो दुख की पीड़ा को ना समझता हो उसका समूल नाश होता है। जो गरीबों को अनदेखा करता है, उसका जीवन कभी परिपूर्ण नहीं हो सकता। अपने लिए जो जीता है वह पशुता है, जो दूसरों के लिए जीता है, वह परोपकारी व संत होता है।
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संयोजक अजय मित्तल ने बताया कि बेसहारा के लिए पहले यह आश्रम 100 बेड का था, अब इसकी संख्या बढ़कर 251 हो गई है। सन्मति शिक्षा सदन बिहारगढ़ के स्कूली बच्चों ने सुंदर सांस्कृतिक प्रस्तुति दी। संचालन मुनेंद्र राणा और अध्यक्षता डॉ पीएल भारद्वाज ने की। इस मौके पर विनोद गोयल, अनिल गुप्ता, राजेश्वर बंसल मौजूद रहे।
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