बडे़ नोटों का चलन बंद होने के बाद से कस्बा और देहात के लोगों की समस्या कम होने का नाम नहीं ले रही है। शादी के लिए और किसानों के लिए बैंकों से पैसे प्राप्त करने की सीमा केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित कर दी गई है। पैसे लेने की सीमा निर्धारित होने के बाद भी किसान, शादी करने वाले बैंकों के चक्कर काट रहे हैं।
नोटबंदी के बाद केंद्र सरकार ने किसानों के बीज खाद के लिए 24 हजार रुपये और शादी वालों को राहत देते हुए दो लाख रुपये एक मुश्त बैंक से निकालने की सीमा निर्धारित की है। लेकिन बैंकों में पर्याप्त कैश न आने के कारण किसान और शादी वाले परिवार शादी के कार्ड लेकर बैंकों के चक्कर काट रहे हैं।
गांव खेड़ामस्तान निवासी अध्यापक शक्ति सिंह का कहना है कि तीन दिन बाद उसकी बेटी की शादी है। वह शादी के कार्ड लेकर अपने खाते से नकदी लेने के लिए बैंकों के चक्कर काट रहा है। लेकिन शादी पैसे नहीं मिल पा रहे हैं।
किसान ओम सिंह, ओमपाल सिंह, महीपाल सिंह, अजय आदि का कहना है कि वे बीज और खाद लेने के लिए बैंकों के चक्कर काट रहे हैं। पूरा-पूरा दिन लाइन में खड़ा होने के बाद गांव वालों को एक या दो हजार रुपये थमा दिए जाते हैं। इतनी कम राशि में गेहूं की बुवाई कैसे होगी, घर का खर्च कैसे चलेगा। इसी बात को लेकर किसान परेशान हैं।
एटीएम से निकले 100-100 के नोट
बुढ़ाना। संडे को बैंक की छुट्टी होने के कारण पैसे-पैसे को तरस रहे कस्बा व देहात के लोगों का बैंकों के बाहर लगे एटीएम ने साथ दिया। नोटबंदी के बाद से जनता एक-एक पैसे के लिए परेशान थी। संडे को बैंक की छुट्टी होने के कारण खाता धारक आहत थे। संडे को सुबह ही एटीएम में पैसे होने की सूचना मिली तो वहां लोगों की लाइन लग गई। कई एटीएम ने 100-100 के नोट उगले। जिसके बाद लोगों को कुछ राहत महसूस हुई।