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उपचुनाव: गुर्जरों को साधने के लिए RLD ने चला दांव, हार की हैट्रिक के बाद खतौली पिच पर मदन भैया की जोर-आजमाइश

Mon, 14 Nov 2022 03:47 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर

सार

By-election: मुजफ्फरनगर की खतौली विधानसभा सीट पर उप चुनाव के लिए रालोद ने पत्ते खोल दिए हैं। गुर्जर प्रत्याशी पर दांव खेलते हुए बागपत की खेकड़ा सीट से तीन बार के पूर्व विधायक बहुचर्चित मदन भैया को मैदान में उतारा है। 
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मदन भैया - फोटो : amar ujala
मुजफ्फरनगर जनपद की खतौली विधानसभा सीट पर उप चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हैं। रालोद ने इस सीट पर पत्ते खोल दिए हैं। गुर्जर प्रत्याशी पर दांव खेलते हुए बागपत की खेकड़ा सीट से तीन बार के पूर्व विधायक बहुचर्चित मदन भैया को रालोद ने मैदान में उतारा है।

रालोद अध्यक्ष जयंत सिंह ने रविवार को जिले में पीपलहेड़ा, तिसंग और मंसूरपुर गांव में जनसभाएं की। तीनों में गाजियाबाद के जावली गांव के रहने वाले पूर्व विधायक मदन भैया मंच पर नजर आए। दिनभर सियासी अटकलें लगाई जा रही थी। जनसभाओं के कुछ घंटे बाद ही रालोद के ट्विटर से पूर्व विधायक मदन भैया को उप चुनाव में प्रत्याशी बनाए जाने का एलान कर दिया गया। इससे पहले मदन भैया मुख्य चुनाव लोनी सीट से लड़े थे, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।  रालोद जिलाध्यक्ष संदीप मलिक ने उनके प्रत्याशी बनाए जाने की पुष्टि करते हुए बताया कि टिकट की घोषणा कर दी गई है। सपा-रालोद गठबंधन अब पूरी ताकत के साथ चुनाव लड़ेगा। खतौली उप चुनाव में भाजपा को हराने का काम किया जाएगा। 
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चौधरी जयंत सिंह - फोटो : अमर उजाला
गुर्जरों को साधने की कोशिश
रालोद ने खतौली के उप चुनाव में पूर्व विधायक मदन भैया को मैदान में उतारकर पश्चिम यूपी में गुर्जरों को साधने की कोशिश की है। परिसीमन के कारण खेकड़ा विधानसभा का वजूद खत्म हो गया और लोनी में एक के बाद एक तीन हार के बाद मदन भैया भी नई सियासी जमीन की तलाश में थे। ऐसे में उपचुनाव का मौका बना तो रालोद ने उन्हें टिकट थमाया। देखने वाली बात यह होगी कि वह खतौली में कितना दमखम दिखा पाते हैं। 

पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सियासत के बहुचर्चित चेहरों में मदन भैया का नाम शामिल है। बागपत की खेकड़ा विधानसभा सीट से वह चार बार विधायक रहे। साल 2012 में परिसीमन हुआ तो खेकड़ा सीट का वजूद खत्म हो गया। इसके बाद अपनी सियासत को संवारने के लिए उन्होंने गाजियाबाद की लोनी सीट से 2012, 2017 और 2022 का विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
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कार्यालय पर पहुंचे खतौली से प्रत्याशी मदन भैया - फोटो : अमर उजाला
मुजफ्फरनगर दंगे के बाद खतौली सीट पर बदले समीकरण
खतौली में उपचुनाव का मौका बना तो मदन भैया ने टिकट लपक लिया। इससे पहले खतौली में गुर्जर उम्मीदवार के तौर पर 2012 में करतार भड़ाना विधायक चुने गए थे। इसके बाद दंगा और खतौली सीट के समीकरण पूरी तरह बदल गए। 

भाजपा के निवर्तमान विधायक विक्रम सैनी ने यहां दोनों बार जिले की सबसे बड़ी जीत दर्ज की। रालोद ने इस सीट पर फिर गुर्जर प्रत्याशी उतारा है। इसकी बगल वाली सीट मीरापुर पर भी गठबंधन से गुर्जर चंदन चौहान विधायक है। ऐसे में रालोद ने गुर्जरों को साधने के लिए इस बार मदन भैया को मौका दिया है।

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रालोद-सपा प्रत्याशी मदन भैया - फोटो : अमर उजाला
खेकड़ा में रूप चौधरी से हारे थे पूर्व विधायक
खेकड़ा विधानसभा सीट पर पूर्व विधायक मदन भैया भाजपा के रूप चौधरी से हार गए थे। इसके बाद वह दोबारा चुनाव जीते। परिसीमन के बाद लोनी में जाकर राजनीतिक जमीन की तलाश की, लेकिन अब तक कामयाबी नहीं मिली।

पूर्व विधायक चंदर सिंह पर हमले में आरोपी
पूर्व विधायक मदन भैया पर कई आपराधिक मुकदमे दर्ज हुए हैं। बागपत के पूर्व विधायक चंदर सिंह पर हमले का भी उन पर आरोप लगा था। साल 2020 में इस मामले में उन पर आरोप भी तय हो गए थे।
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मदन भैया - फोटो : amar ujala
किसी को निराश नहीं करूंगा : मदन भैया
पूर्व विधायक मदन भैया ने कहा कि नेतृत्व ने जो भरोसा जताया है, उस पर खरे उतरने का प्रयास किया जाएगा। जनता को निराश नहीं करूंगा। पूरी तैयारी के साथ गठबंधन के प्रत्याशी के तौर पर वह चुनाव मैदान में उतरेंगे।
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