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रिंकू सिंह राही प्रकरण में 12 साल बाद आया फैसला

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रिंकू सिंह राही प्रकरण में 12 साल बाद आया फैसला
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मुजफ्फरनगर। समाज कल्याण अधिकारी रिंकू सिंह राही पर जानलेवा हमला करने के बहुचर्चित मामले में 12 साल बाद कोर्ट का फैसला आया है। अभियोजन पक्ष ने रिंकू सिंह राही सहित 22 लोगों के कोर्ट में बयान दर्ज कराए तथा सबूत पेश किए। राही के बयान पर ही चार लोगों को सजा हुई।
विशेष लोक अभियोजक यशपाल सिंह ने बताया कि घटना में मुजरिम बॉबी उर्फ पंकज और प्रहलाद की पहचान मुख्य शूटरों के रूप में की थी। जबकि अमित छोकर द्वारा शूटरों को इशारा कर बताया था कि यही रिंकू सिंह राही हैं। इसके अलावा उस दौरान जिले में तैनात सहायक लेखाकार अशोक कश्यप सड़क से रिंकू सिंह के घर की तरफ इशारा कर लौट गया था। राही को हमले में शरीर पर आठ गोलियों लगी थी। उनकी बाई आंख पर चोट लगी और जबरा भी खराब हो गया है। उनका बयान ही सजा का आधार बना है। उधर, विशेष लोक अभियोजक यशपाल सिंह और सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता सहदेव सिंह ने घायल रिंकू राही सहित 22 लोगों की गवाही कराई।
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छात्रवृत्ति प्रतिपूर्ति घोटाले में संलिप्त था लेखाकार
मुजफ्फरनगर। अदालत में बयानों में रिंकू सिंह ने बताए थे कि वह अनुसूचित जाति से हैं। विवाह योजना, छात्रवृत्ति प्रतिपूर्ति, शादी और पेंशन योजनाओं में लेखाकार अशोक कश्यप द्वारा घोटाला किया जा रहा था। राही द्वारा योजनाओं के घोटाले में जांच की जा रही थी। उसी दौरान अन्य आरोपियों ने उन्हें घर और ऑफिस में आकर धमकी दी थी कि पुरानी व्यवस्था पर ही चलो, नहीं तो अंजाम बुरा होगा।
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चार गवाह हो गए पक्षद्रेाही
न्यायालय में एडीजीसी द्वारा प्रस्तुत चार गवाह कोर्ट में पक्षद्रोही हो गए। उनमें सुशील कुमार अरोड़ा, जितेंद्र त्रिपाठी उर्फ रानू, संतोष कुमार और राम प्रवेश यादव ने घटना का समर्थन नहीं किया। केस की विवेचना तत्कालीन एएसपी आलोक प्रियदर्शी द्वारा की गई।
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