जैन मिलन के मंदिर में ऑन लाइन प्रवचन करते प्रणम्य सागर महाराज।
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उत्थान को लोभ का त्याग जरूरी :प्रणम्य
मुजफ्फरनगर। पंचायती मंदिर जैन मिलन में मनाए जा रहे दशलक्षण पर्व में प्रणम्य सागर महाराज ने उत्तम शौच धर्म के लोभ के विषय में बताया। कहा कि जिस प्रकार मिट्टी का डला सिर पर नहीं रखा जा सकता, जब तक वह मिट्टी चिकनी होकर, अपने आसपास के वातावरण से अपना लोभ छोड़कर चाक से ऊपर उठकर कलश नहीं बन जाती, तब तक उसे सिर के ऊपर नहीं रखा जा सकता। उसी प्रकार मनुष्य के उत्थान के लिए लोभ छोड़कर ऊपर उठना ही होगा। लोभ ही माया को जन्म देने वाली है। ऑनलाइन प्रवचन करते हुए उन्होंने कहा कि मन इतना लोभी होता है कि बाजार की प्रत्येक वस्तु पर उसका मोह बना रहता है। जैसे ही उसको हम घर लेे आते हैं, तब वही वस्तु हमें सामान्य से लगनी लगती हैं। इसी के साथ ही आज प्रणम्य सागर महाराज 46 वां अवतरण दिवस भी भक्तिपूर्वक मनाया गया। मुनि श्री के पाद प्रक्षालन, पूजन और शास्त्र दान दिए गए।