एआरटीओ में बिना आदेश किए रजिस्ट्रेशन
मुजफ्फरनगर। सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (एआरटीओ) कार्यालय में वाहनों के पंजीकरण में फर्जीवाड़ा सामने आया है। बाबू ने बिना एआरटीओ के आदेश के ही वाहनों के पंजीकरण करा दिए। इस तरह के सैकड़ों मामले होने की आशंका जताई जा रही है। खुलासा होने पर विभाग में हड़कंप मचा है। संबंधित लिपिक को नोटिस जारी किया गया है।
एआरटीओ कार्यालय में किसी भी तरह के वाहन का पंजीकरण कराने के लिए फाइल पर एआरटीओ के आदेश कराने होते हैं, लेकिन संबंधित लिपिक ने बिना आदेश कराए ही वाहनों का पंजीकरण करा दिया और रजिस्ट्रेशन नंबर भी जारी कर दिए गए। करीब 350 से ज्यादा फाइलों में ऐसा किया गया। एआरटीओ को इसकी भनक भी नहीं लगी। मामला पकड़ में आने पर विभाग में हड़कंप मच गया। एआरटीओ राजीव बंसल ने संबंधित लिपिक शबनम परवीन को नोटिस जारी कर दिया। इसके बाद लिपिक छुट्टी पर चली गईं। जिन फाइलों में बिना आदेश के पंजीकरण हुआ है, उनकी जांच की जा रही है।
- हो सकता है कमीशन बचाने का चक्कर
बताया जाता है कि एआरटीओ कार्यालय में वाहनों के पंजीकरण के लिए अवैध वसूली भी होती है। यह पूरा खेल कमीशन एजेंटों के माध्यम से चलता है। चर्चा है कि कमीशन एजेंट और बाबू ने मिलकर ऊपर का हिस्सा बचाने के चक्कर में यह खेल किया है। उन्होंने कुछ फाइलों में तो एआरटीओ से आदेश करा लिए जबकि कुछ में बिना आदेश के ही पंजीकरण कर दिया।
- चोरी के वाहन भी हो सकते थे पंजीकृत
बिना एआरटीओ की जानकारी के विभाग में वाहनों के पंजीकरण किए गए हैं। इस तरह तो चोरी किए गए वाहनों का भी पंजीकरण आसानी से किया जा सकता था। हालांकि एआरटीओ राजीव बंसल का कहना है कि जो पंजीकरण हुए हैं, उन सबके डाक्युमेंट एकदम ठीक हैं।
- वर्जन
बिना आदेश के करीब 20 वाहनों के पंजीकरण हुए हैं। इन सब फाइलों को चेक कर लिया गया है, सब एकदम ठीक हैं। लिपिक शबनम परवीन की लापरवाही है, उनका स्पष्टीकरण तलब किया गया है। वह बीमार होने के कारण छुट्टी पर हैं। - राजीव बंसल, एआरटीओ।