- थोक मंडी में दो रुपये किलो से नीचे जा रहे गोभी के भाव
संवाद न्यूज एजेंसी
चरथावल। बदलते मौसम का फसलों पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। दिन का तापमान 28 डिग्री के आसपास बना हुआ है, जिससे गेहूं की फसल पर संकट है। साथ ही गोभी भी तेजी से तैयार हो रही है। गोभी की पैदावार बढ़ने से दामों में तेजी से गिरावट के कारण उत्पादकों में मायूसी है। थोक भाव सिर्फ दो रुपये किलो मिल रहा है। अचानक पैदावार बढ़ने के कारण मंडी में गोभी के भाव धड़ाम हो गए है।
चरथावल की अगेती प्रजाति की गोभी जुलाई के महीने में उत्तराखंड और पश्चिम के कई जिलों में पसंद की जाती है। जुलाई से शुरू होने वाली गोभी की फसल सीमांत कृषकों के लिए आजीविका का सौदा माना जाता है। लेकिन इस बार फरवरी में आई मंदी के कारण गोभी उत्पादक हैरत में है। अमूमन इन दिनों गोभी 20 से 22 रुपये किलो थोक मंडी में बिकती थी। जबकि एक पखवाड़े से गोभी के दामों में आई गिरावट से उत्पादकों के साथ आढ़ती भी मंदी की मार झेल रहे है। एक 15 किलो की टोकरी 30 रुपये ही दाम मिल रहे हैं। चरथावल मंडी में कस्बे के अलावा थानाभवन, जलालाबाद, नगला राई से बड़ी मात्रा में गोभी बेचने आते हैं।
मंदी के चलते परिचितों में बांट रहे गोभी
चरथावल के गोभी उत्पादक सुशील कुमार कहते है उनका बेटा मंडी जाने के बजाए गोभी की पूरी टोकरी को परिचितों को बांट रहा है। एक बीघा में हाईब्रीड बीज, दवाओं आदि में काफी लागत आती है। लेकिन आमदनी आधी भी हाथ लग रही है। उन्होंने इस महीने में इतनी मंदी गोभी कभी नहीं देखी है।
महंगा बीज, नहीं मिल रहीं लागत
छिंपीयान निवासी किसान जबर सिंह कहते है लुधियाना से मंहगा बीज मंगाया था। अचानक मंदी के कारण मंडी तक फसल भेजने का किराया भी नहीं निकल पा रहा है। शादी के सीजन में भाव में आई गिरावट शुभ संकेत नहीं है।
एक बीघा में 10 हजार की लागत
सिकंदरपुर निवासी गोभी उत्पादक प्रवीण कश्यप का कहना है एक बीघा में करीब 10 हजार रुपये का खर्च आता है। इस मौजूदा कम भाव मिलने के कारण पांच से छह हजार रुपये भी एक बीघा में निकल पा रहा है।
उत्पादकों के लिए घाटे का सौदा
चरथावल मंडी के आढ़ती कय्यूम पाली कहते है भाव धड़ाम होने से गोभी की महक उत्पादकों के साथ मंडी के आढ़तियों के लिए बेगानी हो गई है। इन दिनों 20 रुपये से किलो कम गोभी बिकती थी। गोभी की फसल चरथावल मंडी की शान मानी जाती है। आवक ज्यादा है और डिमांड कम होने से भाव में कमी आई है। मंडी में रोजाना करीब 300 पोट बिकने के लिए आती है। लेकिन ग्राहक कम ही नजर आते है।
वर्जन:
आने वाले दो तीन दिनों में बारिश की संभावना है। सब्जियों अल्प समय की फसल है। पैदावार के सापेक्ष डिमांड के अनुसार भाव घटते बढ़ते है। तापमान बढ़ेगा तो खीरा, ककड़ी और तरबूज की तेजी से बढ़वार होगी। आने दिनों में डिमांड बढ़ेगी तो रेट फिर बढ़ जाएंगे। वैज्ञानिक दृष्टि से गोभी को सुखाकर पूरे साल प्रयोग किया जा सकता है। हालांकि तापमान बढ़ने से गेहूं की पछेती फसल को नुकसान है। दाना सिकुड़ने के कारण उत्पादन पर फर्क पड़ेगा।
डा. पीके सिंह निदेशक (प्रसार)
सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि विज्ञान केंद्र